भ्रष्टाचार की बहती गंगा में हाथ धो रहे सचिव और जीआरएस!
जनपद चांवरपाठा क्षेत्र में इन दिनों पंचायत स्तर पर चल रहे भुगतान और बिलों की एंट्रियों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। कागज़ों में विकास की मोटी-मोटी इबारतें लिखी जा रही हैं, लेकिन ज़मीन पर हकीकत सूखी दिखाई दे रही है।
“कागज़ों में विकास की रफ्तार तेज, लेकिन ज़मीन पर सन्नाटा— आखिर खेल क्या है?”
बिलों में हेर-फेर का खेल?
सूत्रों के अनुसार सचिव और जीआरएस की जोड़ी बिलों में हेर-फेर का ऐसा खेल खेल रही है, जिसमें कभी स्टेशनरी के नाम पर खर्च, कभी परिवहन के नाम पर भुगतान, तो कभी छोटे कार्यों में बड़ी राशि दर्शाई जा रही है।
- भुगतान से पहले सत्यापन किस स्तर पर हुआ?
- क्या कार्यस्थल का भौतिक निरीक्षण किया गया?
- मस्टर रोल और बिलों का मिलान किसने किया?
“चोर-चोर मौसेरे भाई” वाली खामोशी?
सबसे बड़ा सवाल जनपद चांवरपाठा के अधिकारियों की चुप्पी पर है। यदि सब कुछ नियमों के तहत है तो पारदर्शिता से परहेज़ क्यों? शिकायतें दर्ज होने के बावजूद कार्रवाई की गति बेहद सुस्त क्यों है?
“जब जिम्मेदार मौन हो जाएं, तो संदेह और भी गहरा हो जाता है।”
जनता अब यह जानना चाहती है कि क्या इन भुगतानों की स्वतंत्र जांच होगी? क्या संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएंगे? या फिर यह मामला भी फाइलों के बोझ तले दब जाएगा?
अब देखना यह है कि प्रशासन जागेगा या भ्रष्टाचार की यह गंगा यूँ ही बहती रहेगी…
