श्रीधाम रेलवे स्टेशन के समीप संदिग्ध गतिविधियां?
नरसिंहपुर
गोटेगांव रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म क्रमांक दो के आसपास पिछले कुछ समय से कुछ ऐसी गतिविधियों की चर्चा स्थानीय स्तर पर तेज़ है, जिसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, शाम ढलते ही कुछ महिलाएं/युवतियां क्षेत्र में बार-बार देखी जा रही हैं! स्थानीय लोगों का कहना है कि अंधेरा होते ही इनकी सक्रियता बढ़ जाती है और कुछ युवकों से बातचीत करते हुए भी इन्हें देखा गया है!
हालांकि, अभी तक किसी आधिकारिक एजेंसी या पुलिस प्रशासन द्वारा किसी प्रकार की पुष्टि नहीं की गई है। इसलिए इन गतिविधियों को सीधे किसी अवैध कृत्य से जोड़ना उचित नहीं होगा।
सवाल कई, जवाब कोई नहीं
चूंकि अधिकांश महिलाएं मुंह दुपट्टे या साड़ी से ढके रहती हैं, पहचान करना संभव नहीं हो पाता। ऐसे में मामला अभी केवल “संदेह” और “चर्चा” के दायरे में है।
लेकिन बड़ा सवाल यह है —
- क्या सार्वजनिक स्थलों पर शाम के समय निगरानी पर्याप्त है?
- क्या रेलवे परिसर और आसपास के क्षेत्रों में गश्त नियमित रूप से हो रही है?
- क्या स्थानीय नागरिकों की शिकायतों को गंभीरता से लिया जा रहा है?
प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण
रेलवे स्टेशन जैसे सार्वजनिक स्थल यात्रियों, परिवारों और विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित माने जाते हैं। यदि वहां किसी प्रकार की अनियमित या संदिग्ध गतिविधियां हो रही हैं, तो संबंधित विभागों को सतर्कता बढ़ानी चाहिए।
यह रिपोर्ट किसी व्यक्ति विशेष या वर्ग पर आरोप नहीं लगाती, बल्कि स्थानीय चर्चाओं और नागरिकों की चिंता को सामने रखती है। सत्यता की पुष्टि और आवश्यक कार्रवाई का दायित्व प्रशासनिक एजेंसियों का है।
सामाजिक दृष्टि से भी जरूरी विमर्श
यदि वास्तव में क्षेत्र में कोई अवैध गतिविधि संचालित हो रही है, तो यह केवल कानून का विषय नहीं बल्कि सामाजिक संवेदनशीलता का भी मुद्दा है। ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई के साथ-साथ मानवीय दृष्टिकोण, पुनर्वास और जागरूकता की भी आवश्यकता होती है।
सवाल उठाना पत्रकारिता का दायित्व है, फैसला देना नहीं।
