“सब कछु!” — नरसिंहपुर जिले से आई एक मासूम आवाज़, जो पूरी व्यवस्था को कटघरे में खड़ा करती है?
यह नरसिंहपुर जिले की एक शर्मनाक और विचलित करने वाली तस्वीर है। वह जिला, जहां स्वयं पंचायत मंत्री का निवास है — और उसी जिले के गांव मवई पिपरिया से एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
वीडियो की सच्चाई
वीडियो में बताया जा रहा है कि एक बालिका अपनी नानी के साथ गांव में निवास करती है। नानी के जीवन का एकमात्र सहारा — वृद्धा पेंशन।
जब वीडियो बनाने वाला युवक बच्ची से पूछता है —
“बेटा, आपको सरकार से क्या मदद चाहिए?”
तो बच्ची बड़ी मासूमियत से जवाब देती है —
“सब कछु!”
यह जवाब भीख नहीं, सिस्टम पर आरोप है
यह शब्द किसी लालच का परिणाम नहीं है। यह उस व्यवस्था पर सवाल है, जो एक बच्चे को यह तक नहीं बता पाई कि उसे क्या मांगना चाहिए।
जब वही सवाल नानी से किया जाता है, तो उनका दर्द और भी गहरा हो जाता है। उनकी चिंता सिर्फ आज की रोटी या कपड़ों तक सीमित नहीं है — यह चिंता बच्ची के पूरे भविष्य को लेकर है।
सोशल मीडिया की मदद — समाधान या मजबूरी?
वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर कई लोग मदद के लिए आगे आ रहे हैं। यह मानवीय संवेदना सराहनीय है —
लेकिन सवाल यह है — क्या यह स्थायी समाधान है?
आज एक बच्ची का वीडियो वायरल हुआ, इसलिए मदद मिल रही है। लेकिन जिले में ऐसे सैकड़ों परिवार और बच्चे हैं, जो कैमरे से दूर, बदतर हालात में जीवन जीने को मजबूर हैं।
अमृतकाल बनाम हकीकत
यहां सवाल केवल एक बच्ची का नहीं है। यह सवाल उस डबल इंजन सरकार के अमृतकाल पर है, जिसके दावे मंचों पर गूंजते हैं।
जब पंचायत मंत्री के क्षेत्र में ही —
- गरीबी है
- भूख है
- असहाय बुजुर्ग हैं
- और “सब कछु” मांगने को मजबूर बच्चे हैं
तो विकास के ये दावे किसके लिए हैं?
यह सिर्फ भावुक वीडियो नहीं, चेतावनी है
यह वीडियो एक भावनात्मक कंटेंट नहीं है। यह एक चेतावनी है —
अगर सरकारें, प्रशासन और जनप्रतिनिधि इन आवाज़ों को नहीं सुनेंगे, तो “सब कछु” मांगने वाली पीढ़ी कल जवाब मांगना सीखेगी।
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