*कागजी तालाब मामले ने लिया नाटकीय मोड़?: ग्राम पंचायत पलेरा:जनपद पंचायत चिचली:नरसिंहपुर*
चिचली जनपद के अंतर्गत आने वाले ग्राम पलेरा के वर्तमान हालात क्या हैं?गांव में कितना कुछ बदला और कितना कुछ बदलना अब भी बाकी है? कल तक जो ग्रामीण करप्शन,अतिक्रमण,अवैध शराब बिक्री,अवैध रेत के कारोबार,गांव में पसरी गंदगी को लेकर चिंतित थे, क्या आज उनकी सभी चिंताएं मिट गई है?
बदलाव आया हो या न आया हो लेकिन लोगों ने खामोश रहना सीख लिया है?यह बेहद हैरान करने वाली बात है की कल तक जो लोग अन्याय,अत्याचार,शोषण के खिलाफ आवाज उठा रहे थे,वे लोग आज तंत्र की हां में हां मिला कर सिर हिला रहे हैं!
ग्रामीणों का आरोप है की,क्या अधिकारियों को पेश किए जा रहे नजराने और शुकराने के लिफाफे?
हालांकि सभी एक से हों ऐसा भी नहीं है, कुछ अधिकारी अभी भी अपवाद के रूप में कार्य कर रहे हैं जिनको अपनी ईमानदारी पर नाज है।
वैसे इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि नजराने में वो दम होता है कि सब जायज मानकर खुली छूट दे दी जाती है।
यह नजराने की ही खासियत है सांप को रस्सी और रस्सी को सांप बना दिया जाता है।
विभाग द्वारा की जा रही कार्रवाईयो को पर्दो के पीछे अंजाम दिया जाना कहां तक उचित है? ग्रामीणों द्वारा अधिकारियों की कार्यशैली पर लगातार अंगुली उठाई जा रही है।
जीआरएस,सचिव,सरपंच और अधिकारियों की मिलिभागत से कागजी खेत तालाब का निर्माण कर ना सिर्फ सरकारी राशि को पलीता लगाया गया बल्कि मनरेगा मजदूरी योजना की मंशा पर भी सवालिया निशान लगा दिया!कुछ दिनो तक मामला सुर्खियों मे छाया रहा और मामला ठंडा पड़ते ही अधिकारियों ने फाइलों को ठंडे बस्ते में डाल दिया!
फर्जी हाजिरी जिम्मेदारों की सह में रोजगार सेवक लगा रहा है इस पूरे क्रम ने रोजगार सेवक, तकनीकी सहायक से लेकर जिले पर बैठे आला अधिकारी तक के सम्मलित होने के संकेत मिल रहे।ग्राम पंचायत पलेरा में जिम्मेदारों की मिलीभगत से जमकर फर्जी हाजिरी लगाई जा रही है, इस पूरे कारनामे तकनीकी सहायक और रोजगार सेवक आपस में मिलकर फर्जी हाजिरी दर्ज कर सरकारी धन का बंदरबांट कर अपनी अपनी जेब भरने में मशगूल है।
बिना सत्यापन ही किस आधार पर कागजी तालाब के लिए मजदूरी का भुगतान किया गया?जबकि मौका पर कोई तालाब का निर्माण किया ही नहीं जा रहा था!गांव वालों की आंखों में धूल झोंक कर सरपंच सतीष, जीआरएस कृष्ण कुमार,सचिव,इंजीनियर, मेट और सीईओ अपनी जेब भर रहे थे?
ग्राम पंचायत पलेरा में हो रहे फर्जीवाड़े की भनक भी जिला पंचायत अधिकारी को क्यों नही लगी यह बड़ा सवाल है। लोगों का कहना है कि तेज तर्रार अफसरों ने क्या कभी निगरानी की ही नही, और की थी तो फिर इतना बड़ा फर्जीवाड़ा नजर क्यों नही आया। नजर आया भी था तो तत्काल कारवाई क्यों नही की गई..?
काम कोई भी हो हर किरदार के दाम तय हैं,कहा तो यहां तक भी जाता है की सबको मैनेज करना पड़ता है,इसलिए सब चलता है।विश्वानीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक काम प्रारंभ होने के पूर्व ही अपने अपने हिस्से को लेकर पहले ही बोली लगा दी जाती है।
जारी :