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*सरपंच मनरेगा मजदूरों के पलायन के लिए कितना जिम्मेदार?: ग्राम पंचायत पलेरा:जनपद चिचली:नरसिंहपुर*

नरसिंहपुर जिले के चिचली जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत पलेरा में जिम्मेदार सरपंच व सचिव द्वारा हर निर्माण कार्य में भारी पैमाने पर भ्रष्टाचार किया गया। इसका जीता जागता उदाहरण तब देखने को मिला जब गांव में तालाब निर्माण के लिए राशि को तो सरकारी खाते से निकाल लिए, लेकिन काम तालाब में नहीं हुआ, कामों को केवल कागजों में दर्शा दिया गया।

बड़ी बात यह है कि समय-समय पर ग्रामीण इन काले कारनामों की शिकायत वरिष्ठ अधिकारियों से करते रहे, इसके बाद भी अधिकारी बस जांच की बात बोलकर इस भ्रष्टाचार में अपनी मौन स्वीकृति देते रहे।

जब निर्माण ही नहीं हुआ तो मूल्यांकन कैसा यह विचारणीय पहलू है। ग्राम पंचायतों में होने वाले मनरेगा कार्य में जमकर फर्जीवाड़ा किया जा रहा है और मजदूरों के हेरफेर की विधा के चलते फर्जी हाजिरी लगाकर कुशल और अकुशल श्रमिकों की दैनिक मजदूरी का आहरण करके जिम्मेदारों द्वारा डकारी जा रही है लाखों रुपए की भारी भरकम धनराशि तथा कागजी विकास कार्यों से चाक चौबंद हो रहे हैं ग्रामीण क्षेत्र।

सरकार लाख प्रयत्न करती है की मजदूरों को उनका हक और दो टाइम की रोटी मुहैया कराई जाए इसी को ध्यान में रखते हुए रोजगार गारंटी यानी मनरेगा योजना जो की सरकार ने लागू की है मजदूरों के लिए उन प्रवासी मजदूरों के लिए जो दो वक्त की रोटी दो वक्त का खाना कमा सकें इसकी राशि भी सरकार देती है लेकिन अधिकारी कर्मचारी सरकार के मंसूबों पर पानी फेरते नजर आ रहे हैं।

प्रशासन की हितग्राही योजना हो या अन्य कार्य सभी कार्य में सचिव ,रोजगार सहायक की दबंगई के चलते फर्जीवाड़ा करने में कतई परहेज नहीं किया जाता निर्माण एजेंसी सरपंच, सचिव, रोजगार सहायक मशीनों से काम कराकर फर्जी मस्टररोल बनाकर राशि निकाल रहे हैं ऐसा भी नहीं कि इसकी जानकारी अधिकारियों को ना हो लेकिन कमीशन खोरी के चलते सब मौन है जिसकी शिकायत अधिकारियों से की जाती है लेकिन आज दिनांक तक कोई कार्यवाही नहीं की।

पंचायत स्तर पर मजदूर वर्ग को काम दिलाने के लिए शासन की ओर से मनरेगा योजना के तहत उन्हें कम से कम १०० दिवस का रोजगार दिलाए जाने की प्रावधान है। लेकिन जिले की अधिकतर ग्राम पंचायतों में जॉब कार्डधारी मजदूरों को काम नहीं दिलाया जा रहा है। जिससे जिले से अधिकतर मजदूरों का पलायन करने के लिए विवश हो रहे हैं।

दरअसल सरपंच और रोजगार सहायक ने अधिकारी और मनरेगा के कर्मचारियों की मिलीभगत से पूरी गड़बड़ी को अंजाम दिया है। अब मामला उजागर होने के बाद अधिकारी लीपापोती में जुट गए हैं।

भ्रष्टाचारियों को ग्रामवासियों की जरा भी परवाह नहीं बस अपने घर में हर प्रकार की सुविधा और अपने घर को सजाने में लगें है,इन सुविधाओं से वांछित यदि कोई ग्रामीण हिम्मत कर के संबंधित उच्चाधिकारी को जा कर इसकी शिकायत करता है तो सिर्फ आश्वासन दे दिया जाता है कि कार्यवाही करेंगे पर कार्यवाही नहीं होती बल्कि शिकायत करता के ऊपर दबाव बना दिया जाता है इसलिए कि दोबारा शिकायत न करे।

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