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।।सांकेतिक चित्र।।

सत्य और समाज के बीच की कड़ी

मुबारक हो! हम 'अमृत काल' में जी रहे हैं, लेकिन नरसिंहपुर के बारहा बड़ा में कीचड़ का 'अमृत' बह रहा है!

आजादी के 79 साल बाद भी विकास की गंगा ऐसी बही है कि चीचली जनपद पंचायत का ग्राम बारहा बड़ा (वार्ड 4 और 5) टापू बन गया है।

आजादी के 79 साल बाद भी विकास की गंगा ऐसी बही है कि चीचली जनपद पंचायत का ग्राम बारहा बड़ा (वार्ड 4 और 5) टापू बन गया है। ग्रामीण पिछले 49 दिनों से धरने पर बैठे हैं, लेकिन हुक्मरानों के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही। सच ही कहा है—"अंधेर नगरी, चौपट राजा, टके सेर भाजी टके सेर खाजा!"

प्रशासन का रवैया देखकर तो यही लगता है कि नेताओं के लिए जनता की तकलीफें "भैंस के आगे बीन बजाने" जैसी हैं।

साहब! जब रास्ते दलदल बन जाएं और बच्चे कीचड़ में सराबोर होकर स्कूल जाने को मजबूर हों, तो "चिराग तले अंधेरा" नहीं तो और क्या कहेंगे? 'पढ़ेगा इंडिया, तभी तो बढ़ेगा इंडिया' का नारा देने वालों, जरा आकर बारहा बड़ा के बच्चों का हाल देखो! बच्चों ने तंग आकर कह दिया है—"नौ दिन चले अढाई कोस" वाली आपकी व्यवस्था हमें नहीं चाहिए, सड़क नहीं तो स्कूल भी नहीं! अब बच्चे पढ़ाई छोड़ आंदोलन की ककहरा सीख रहे हैं।

प्रशासन को ऐसा लग रहा है कि मांगें नहीं, मानो 'चांद-तारे' मांग लिए हों!

ग्रामीणों की प्रमुख मांगें

  • पेट्रोल पंप से उमर नदी और कंछेदी कुशवाहा के घर से प्रकाश होरी के मकान तक सड़क (ताकि लोग 'राम नाम सत्य' होने से पहले अस्पताल पहुंच सकें)।
  • 'अटल ज्योति' का उजाला (ताकि 'दीया तले अंधेरा' दूर हो और ट्रांसफार्मर लग सके)।
  • पीने का पानी (ताकि प्यास बुझाने के लिए 'दर-दर की ठोकरें' न खानी पड़ें)।
  • प्रधानमंत्री आवास (ताकि गरीबों को कागजी नहीं, असली छत मिले)।

मध्य प्रदेश किसान सभा के नेतृत्व में ग्रामीणों ने कलेक्टर से लेकर जिला पंचायत CEO तक को ज्ञापन सौंपकर आखिरी चेतावनी दे दी है। अब तक ग्रामीण "घी सीधी उंगली से निकालने" की कोशिश कर रहे थे, लेकिन जब "लातों के भूत बातों से नहीं मानते", तो उंगली टेढ़ी करनी ही पड़ती है।

ग्रामीणों की साफ चेतावनी है कि अगर बारिश से पहले काम शुरू नहीं हुआ, तो भूख हड़ताल, पुतला दहन और चक्का जाम होगा।

तब मत कहना कि जनता "अधजल गगरी छलकत जाए" की तरह भड़क रही है।

अधिकारियों कान खोलकर सुन लो 49 दिन का सब्र अब बारूद बन चुका है। कागजी घोड़ों को अस्तबल से बाहर निकालिए और जमीन पर काम दिखाइए, वरना जनता "ईंट से ईंट बजाने" को तैयार बैठी है!

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