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सत्य और समाज के बीच की कड़ी

शर्मनाक! ग्राम रांकई को नरक बनाने पर तुले डेयरी संचालक, पंचायत की चुप्पी पर उठे सवाल

ग्रामीणों ने की सख्त कार्रवाई की मांग, बीमारी फैलने की जताई आशंका

"डेयरी का मुनाफा चंद लोगों की जेब में जा रहा है, लेकिन बीमारी का खतरा और नरक जैसी जिंदगी पूरे रांकई गाँव को तोहफे में मिल रही है। यह मनमानी अब और नहीं चलेगी।"

ग्राम रांकई में सार्वजनिक स्वच्छता व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि गाँव में संचालित कुछ डेयरियों द्वारा मवेशियों का गोबर और अन्य अपशिष्ट सीधे सार्वजनिक नालियों में बहाया जा रहा है, जिससे पूरे क्षेत्र में गंदगी, दुर्गंध और स्वास्थ्य संबंधी खतरे पैदा हो गए हैं।

📍 नालियां बनीं गोबर का अड्डा

ग्रामीणों के अनुसार गाँव की नालियां पूरी तरह गोबर और अपशिष्ट पदार्थों से भर चुकी हैं। कई स्थानों पर पानी का निकास बाधित हो गया है, जिससे सड़न और बदबू का वातावरण बना हुआ है। लोगों का कहना है कि हालात इतने खराब हैं कि आसपास रहना भी मुश्किल होता जा रहा है।

स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि अब्दुल वजीर डेयरी सहित कुछ अन्य डेयरी संचालक अपने पशुओं का कचरा और गोबर नालियों में बहाकर सार्वजनिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

⚠️ पंचायत की भूमिका पर सवाल

ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम पंचायत, सरपंच और सचिव को इस समस्या की जानकारी होने के बावजूद अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है। लोगों ने सवाल उठाया है कि यदि सार्वजनिक नालियों का इस प्रकार दुरुपयोग हो रहा है तो जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा इसे रोकने के लिए आवश्यक कदम क्यों नहीं उठाए जा रहे हैं।

क्या पंचायत किसी बड़ी बीमारी या महामारी के फैलने का इंतजार कर रही है? ग्रामीणों ने प्रशासन से यह सवाल सीधे तौर पर पूछा है।

🏥 बीमारी फैलने का खतरा

विशेषज्ञों के अनुसार नालियों में जमा गोबर और गंदगी मच्छरों तथा अन्य रोग फैलाने वाले जीवों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करती है। इससे डेंगू, मलेरिया, डायरिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं हुआ तो स्वास्थ्य संकट पैदा हो सकता है।

📢 ग्रामीणों की प्रमुख मांगें

  • ग्राम पंचायत तत्काल नालियों की सफाई करवाए।
  • अब्दुल वजीर डेयरी सहित सभी दोषी डेयरी संचालकों को नोटिस जारी कर कार्रवाई की जाए।
  • दोषियों पर नियमानुसार जुर्माना लगाया जाए।
  • डेयरी संचालकों को गोबर निपटान हेतु सोख्ता गड्ढा या बायोगैस सिस्टम बनाने के निर्देश दिए जाएं।
  • सार्वजनिक नालियों में अपशिष्ट बहाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए।

📝 प्रशासन को चेतावनी

ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा है कि यदि पंचायत द्वारा जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो वे मामले की शिकायत सीएम हेल्पलाइन, जिला कलेक्टर कार्यालय एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में लिखित रूप से करेंगे।

"गाँव की नालियां किसी की निजी संपत्ति नहीं हैं। सार्वजनिक व्यवस्था और स्वच्छता बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।"
नोट : यह समाचार ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों और स्थानीय स्तर पर उठाई गई शिकायतों पर आधारित है। संबंधित पक्ष का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
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