नरसिंहपुर जिले में पंचायतराज व्यवस्था का मखौल उड़ाया जा रहा है और इसके मुख्य संरक्षक बने बैठे हैं जिला पंचायत अधिकारी गजेंद्र नागेश? साहब की कुर्सी पर बैठने की ऐसी मलाईदार आदत पड़ी है कि नीचे चल रहे खुलेआम घपले और फर्जीवाड़े इन्हें नजर ही नहीं आते, या फिर यूं कहें कि इनकी 'सहमति' के बिना पत्ता भी नहीं हिलता!
जनपद पंचायत चांवरपाठा की ग्राम पंचायत भूमियाढाना में कागजों पर जो कारनामा किया जा रहा है, उसे देखकर तो यही लगता है कि अधिकारी फाइलों की जांच अपनी टेबल पर बैठकर नहीं, बल्कि 'भांग' खाकर गहरी नींद में कर रहे हैं?
पंचायत के सचिव और जीआरएस ने मिलकर जो बिल पोर्टल पर अपलोड किया है, उसकी तस्वीर ऐसी धुंधली है कि उसमें सड़क कम और घोटाले का काला धुआं ज्यादा नजर आ रहा है!
इस 'मिस्टर गोलू' से सचिव और GRS का कौन-सा जन्मांतर का रिश्ता है? 'गोलू' नाम का यह जादुई चिराग आखिर किसकी जेबें गर्म कर रहा है?
ऐसा लगता है कि पंचायत के सचिव और जीआरएस को इस 'गोलू' से कोई गहरा और पुराना अटूट प्रेम है! जनाब, यह ₹66,816 का धुंधला बिल तो सिर्फ 'ट्रेलर' है, असली फिल्म तो ऐसे दर्जनों संदिग्ध बिलों की फाइलों में दबी पड़ी है।
'गोलू' के नाम पर बिल फाड़े जाते हैं, धुंधली तस्वीरों का पर्दा गिराया जाता है और सरकारी खजाने से माल साफ कर लिया जाता है! आखिर क्या राज़ है सचिव, जीआरएस और इस 'गोलू' की तिगड़मबाज़ी का?
बिल में क्या लिखा है, किस बात के पैसे हैं-किसी को कुछ नहीं पता, बस आँख बंद करके सरकारी तिजोरी से पैसा ट्रांसफर कर दिया गया!
जब नीचे बैठे सचिव और जीआरएस ने यह फर्जीवाड़ा रचा, तो क्या जिला पंचायत अधिकारी गजेंद्र नागेश को यह सब नजर नहीं आया या फिर उनकी शह पर ही यह सब खुला खेल खसोट चल रहा है?
जब ऐसे अस्पष्ट और फर्जीनुमा बिलों पर बिना क्रॉस-चेक किए लाखों के भुगतान पास हो रहे हैं, तो साफ है कि दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली है!
अब जनता पूछ रही है कि ,इस खुली लूट पर कब चलेगा हथौड़ा और कब नंगे होंगे ये भ्रष्टाचारी?
