क्या नरसिंहपुर अब भी अनपढ़ है?
नरसिंहपुर जिला… जिसे कभी शिक्षा के मामले में पूरे देश में मिसाल माना गया… आज वही जिला एक बार फिर साक्षरता अभियान का केंद्र बना हुआ है।
1992 में पूर्ण साक्षर… 2025 में 41 हजार निरक्षर? आखिर सच क्या है?
1992 में बना था देश का दूसरा पूर्ण साक्षर जिला
इतिहास गवाह है… वर्ष 1992 में नरसिंहपुर जिले को "पूर्ण साक्षर जिला" घोषित किया गया था।
- मध्यप्रदेश का पहला पूर्ण साक्षर जिला
- देश में केरल के एर्नाकुलम के बाद दूसरा पूर्ण साक्षर जिला
- शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान
उस समय यह उपलब्धि नरसिंहपुर के लिए गर्व की बात थी… लेकिन अब वही जिला फिर से निरक्षरों की सूची में दिख रहा है।
41,181 लोग… फिर से साक्षरता परीक्षा में
अब तक प्राप्त मौजूदा जानकारी के अनुसार 15 वर्ष से अधिक आयु के निरक्षरों को साक्षर बनाने के लिए "उल्लास - नव भारत साक्षरता कार्यक्रम (NILP)" चलाया जा रहा है।
यह केंद्र प्रायोजित योजना वर्ष 2021-22 से 2025-26 (अब 2027 तक विस्तारित) अवधि के लिए लागू है!
सितंबर 2025 में आयोजित बुनियादी साक्षरता परीक्षा में 41,181 निरक्षर लोग शामिल हुए!
विकासखंडवार तस्वीर भी चौंकाने वाली
- सांईखेड़ा — 8,000+
- चीचली — 7,800+
- करेली — 5,000+
- नरसिंहपुर — हजारों पुरुष और महिलाएं
यह आंकड़े सिर्फ संख्या नहीं… बल्कि जिले की जमीनी सच्चाई को सामने ला रहे हैं!
अब सबसे बड़ा सवाल…
जब 1992 में नरसिंहपुर को पूर्ण साक्षर जिला घोषित किया जा चुका था… तो फिर आज हजारों लोग निरक्षर कैसे?
- क्या पूर्ण साक्षरता सिर्फ कागजों तक सीमित थी?
- क्या शिक्षा की निरंतरता नहीं बनी?
- या फिर नए अभियान सिर्फ आंकड़ों का खेल बन गए हैं?
कागजी अभियान या जमीनी सच्चाई?
यदि 1992 में जिला पूर्ण साक्षर था… तो 2025 में 41 हजार निरक्षर मिलना कई सवाल खड़े करता है।
क्या नरसिंहपुर फिर से पीछे चला गया? या फिर पूर्ण साक्षरता का दावा ही अधूरा था?
एक समय देश में उदाहरण रहा नरसिंहपुर… आज खुद सवालों के घेरे में है।
