जिला पंचायत अधिकारी ग्राम पंचायतों में चल रहे गबन के खेल पर अंकुश लगाने में नाकाम?
चिचली, करेली और गोटेगांव जनपद की पंचायतों में आर्थिक अनियमितताओं पर आखिर कार्रवाई क्यों नहीं?
जिले की कई ग्राम पंचायतों से आर्थिक अनियमितताओं की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। लेकिन सवाल यह है कि जब शिकायतें सार्वजनिक हैं, दस्तावेज़ों में विसंगतियां सामने हैं, तब भी जिला पंचायत अधिकारी की ओर से ठोस जांच और निर्णायक कार्रवाई क्यों नहीं हो पा रही?
क्या यह प्रशासनिक शिथिलता है… या फिर किसी अदृश्य दबाव की कहानी?
📍 चिचली जनपद – ग्राम पंचायत पनारी
0 जनपद की ग्राम पंचायत पनारी में खर्चों को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। दर्ज व्यय और जमीनी हकीकत में अंतर की शिकायतें सामने आई हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि विकास कार्यों के नाम पर राशि आहरित तो हुई, पर काम अधूरे या नगण्य दिखाई देते हैं।
📍 करेली जनपद – ग्राम पंचायत आमगांव
1 क्षेत्र की ग्राम पंचायत आमगांव में सूचना अधिकार के तहत मांगी गई जानकारियों को लेकर भी पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लगा हुआ है। आर्थिक लेनदेन और भुगतान संबंधी विवरण स्पष्ट रूप से सार्वजनिक क्यों नहीं किए जा रहे?
📍 गोटेगांव जनपद – ग्राम पंचायत चांदनखेड़ा
2 जनपद की ग्राम पंचायत चांदनखेड़ा में भी वित्तीय गड़बड़ियों की शिकायतें सामने आई हैं। भुगतान और कार्य निष्पादन के बीच अंतर ग्रामीणों में असंतोष का कारण बना हुआ है।
जब एक नहीं, बल्कि कई पंचायतों से समान शिकायतें सामने आएं — तो क्या इसे मात्र संयोग कहा जाए?
⚖️ जवाबदेही तय कब?
जिला पंचायत अधिकारी की जिम्मेदारी है कि वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करें, शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराएं और दोषियों पर कार्रवाई करें। यदि शिकायतें निराधार हैं तो खुली और समयबद्ध जांच से सच्चाई सामने लाई जाए। और यदि सही हैं, तो कार्रवाई में देरी क्यों?
लोकतंत्र में प्रशासनिक मौन कई बार संदेह को जन्म देता है। जनता जानना चाहती है — उनके टैक्स और विकास निधि का हिसाब आखिर कौन देगा?
