शहर की सुबह अब सुकून भरी नहीं रही। सुभाष पार्क चौराहा और अष्टांग चौराहा पर इन दिनों आवारा कुत्तों के झुंड खुलेआम घूमते नजर आते हैं। राहगीरों के मन में हर पल एक अनजाना डर बना रहता है — न जाने कब कौन सा झुंड अचानक हमला कर दे।
सुबह महिलाएं टहलने निकलती हैं, छोटे बच्चे स्कूल बस पकड़ने दौड़ते हैं, कॉलेज छात्र-छात्राएं अपने भविष्य की ओर कदम बढ़ाते हैं — लेकिन हर कदम पर दहशत साथ चलती है।
⚠️ सुभाष पार्क चौराहा: डर का साया
सुबह 5 से 8 बजे के बीच यहां कुत्तों के झुंड आक्रामक हो जाते हैं। कई बार राहगीरों को घेरने और बाइक सवारों के पीछे दौड़ने की घटनाएं सामने आई हैं। महिलाएं अब अकेले निकलने से हिचक रही हैं।
⚠️ अष्टांग चौराहा: हर पल अनहोनी की आशंका
अष्टांग चौराहे पर भी हालात चिंताजनक हैं। स्कूल जाने वाले बच्चों के माता-पिता हर दिन चिंता में रहते हैं कि कहीं रास्ते में कोई हादसा न हो जाए। बुजुर्गों के लिए यह इलाका और भी खतरनाक बनता जा रहा है।
क्या प्रशासन किसी बड़ी घटना का इंतजार कर रहा है? क्या किसी मासूम के घायल होने के बाद ही जिम्मेदार विभाग जागेगा?
📢 नागरिकों की मांग
- आक्रामक कुत्तों को तत्काल पकड़ने की व्यवस्था
- नसबंदी और टीकाकरण अभियान में तेजी
- संवेदनशील चौराहों पर नियमित निगरानी और गश्त
शहर की सुबह अब सैर और शांति की नहीं, बल्कि सावधानी और भय की कहानी बन चुकी है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह आतंक किसी बड़ी त्रासदी में बदल सकता है।
