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सत्य और समाज के बीच की कड़ी

*ग्राम पंचायत बरहेटा में मृत गौवंश का अपमान?*
नियम ताक पर, 2600 रु में शव फेंकने का खेल!

ग्राम पंचायत बरहेटा में मृत गायों और अन्य पशुओं के अंतिम संस्कार को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आ रही है। आरोप है कि मृत गौवंश को ससम्मान अंतिम संस्कार देने के बजाय फेंका जा रहा है, जबकि पंचायत इसके लिए 2600 रुपये तक का भुगतान भी कर रही है।

सवाल यह है कि जब भुगतान हो रहा है तो फिर नियमों का पालन क्यों नहीं?

क्या कहते हैं नियम?

मध्य प्रदेश ग्राम पंचायत (मृत शरीरों का निपटान) नियम, 1998 के तहत पंचायत को गाँव की सीमा के बाहर मृत पशुओं को दफनाने या जलाने के लिए स्थान निर्धारित करना अनिवार्य है।

मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुसार गौवंश का अंतिम संस्कार ससम्मान किया जाना चाहिए। इसके लिए ‘समाधि कम्पोस्ट’ पद्धति को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिसमें गड्ढे में नमक, चूना और गोबर खाद का उपयोग कर शव को खाद में परिवर्तित किया जाता है।

नियमानुसार शव को सतह से कम से कम 1.22 मीटर (लगभग 4 फीट) गहरा दफनाना आवश्यक है, ताकि अन्य जानवर उसे नुकसान न पहुँचा सकें।

वहीं ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 के तहत भी पशुओं के शवों का वैज्ञानिक तरीके से निपटान करना स्थानीय निकायों का दायित्व है।

2600 रुपये में क्या हो रहा है?

जानकारी के अनुसार, गौशाला में मृत गायों और जानवरों को फेंकने के नाम पर पंचायत 2600 रुपये तक का भुगतान कर रही है। यदि यह राशि केवल शव को कहीं भी फेंक देने के लिए दी जा रही है, तो यह न सिर्फ गैर जिम्मेदाराना बल्कि स्पष्ट रूप से नियमों के विरुद्ध और अवैधानिक कृत्य है।

क्या यह गौ सम्मान है या केवल कागजों में निभाई जा रही औपचारिकता?

स्वास्थ्य पर भी खतरा

नियम विरूद्ध तरीके से मृत पशुओं को फेंकना न केवल धार्मिक आस्था का अपमान है, बल्कि यह गंभीर स्वास्थ्य संकट को भी जन्म दे सकता है। सड़ते शवों से संक्रमण, बदबू और पर्यावरण प्रदूषण फैलने की आशंका बनी रहती है।

प्रशासन क्या करेगा?

अब बड़ा सवाल यह है कि क्या संबंधित अधिकारी इस मामले में संज्ञान लेंगे? क्या भुगतान की जांच होगी? क्या दोषियों पर कार्रवाई होगी? या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?

ग्राम पंचायत बरहेटा में मृत गौवंश के साथ हो रही यह कथित लापरवाही कई सवाल खड़े कर रही है — जवाब प्रशासन को देना होगा।

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