चिचली जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत बारहा बड़ा में ‘साफ-सफाई’ के नाम पर सरकारी राशि का सफाया?
कागज़ों में चमक, ज़मीन पर बदहाली — आखिर किसे बचाने की कोशिश?
चिचली जनपद के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत बारहा बड़ा इन दिनों गंभीर सवालों के घेरे में है। आरोप है कि साफ-सफाई और स्वच्छता कार्यों के नाम पर सरकारी राशि का उपयोग कागज़ों में तो दर्शाया गया, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात पूरी तरह विपरीत नजर आ रहे हैं।
“जहां दस्तावेज़ों में नियमित सफाई, कचरा उठाव और स्वच्छता अभियान चलने का उल्लेख है, वहीं गांव की गलियों में गंदगी और जाम नालियां वास्तविकता बयान कर रही हैं?”
जमीनी हकीकत क्या कहती है?
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार:
- सार्वजनिक स्थलों पर कचरे के ढेर देखे जा सकते हैं।
- नालियों की नियमित सफाई का दावा किया गया, परंतु अधिकांश स्थानों पर जाम स्थिति है।
- कचरा संग्रहण व्यवस्था का कोई स्थायी प्रबंधन दिखाई नहीं देता।
यदि नियमित साफ-सफाई के नाम पर भुगतान किया गया है, तो उसका प्रत्यक्ष प्रभाव गांव में क्यों नहीं दिख रहा?
स्टेशनरी बिलों में भी गड़बड़ी के आरोप
मामले का एक और चिंताजनक पहलू सामने आया है—स्टेशनरी और अन्य सामग्रियों के बिलों में कथित हेर-फेर। सूत्रों के अनुसार कई बिलों में:
- मदवार विवरण स्पष्ट नहीं है,
- खरीदी गई सामग्री का पूरा उल्लेख नहीं किया गया,
- भुगतान की राशि और सामग्री की उपलब्धता में असंगति दिखाई देती है।
“अपूर्ण जानकारी दर्ज कर जनता और प्रशासन को गुमराह करने का प्रयास तो नहीं किया जा रहा?”
जनता के सवाल
- क्या संबंधित अधिकारियों द्वारा भौतिक सत्यापन किया गया?
- क्या सफाई कार्यों का निरीक्षण रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी?
- क्या स्टेशनरी खरीद से जुड़े बिलों की स्वतंत्र जांच होगी?
स्वच्छता जैसे संवेदनशील विषय पर यदि अनियमितता हुई है, तो यह केवल वित्तीय गड़बड़ी नहीं बल्कि ग्रामीणों के मूल अधिकारों के साथ खिलवाड़ है।
अब देखना यह है कि प्रशासन पारदर्शी जांच कर सच्चाई सामने लाएगा या फिर कागज़ी आंकड़ों की परतों में वास्तविकता दबा दी जाएगी।
जनता जवाब चाहती है — और जवाब मिलना ही चाहिए।
