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सत्य और समाज के बीच की कड़ी
मध्य प्रदेश पर ₹5.31 लाख करोड़ का कर्ज!
विकास की रफ्तार या आने वाली पीढ़ियों पर बढ़ता वित्तीय बोझ?
प्रदेश की सियासत में इन दिनों सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर कर्ज का यह बढ़ता आंकड़ा राज्य को किस दिशा में ले जा रहा है।
डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली सरकार के कार्यकाल में राज्य का कुल कर्ज फरवरी 2026 तक अनुमानित
₹5.31 लाख करोड़ तक पहुँच गया है।
📊 कर्ज बनाम बजट: आंकड़े क्या कहते हैं?
कुल कर्ज (मार्च 2026 अनुमानित): ₹5.31 लाख करोड़
वित्तीय वर्ष 2025-26 का बजट: ₹4.21 लाख करोड़
अंतर: कर्ज बजट से लगभग ₹1.10 लाख करोड़ अधिक
दैनिक औसत कर्ज: ₹125 से ₹200 करोड़ प्रतिदिन
सवाल यह नहीं कि कर्ज लिया जा रहा है, सवाल यह है कि उसकी सीमा और पारदर्शिता कितनी है?
📌 कर्ज बढ़ने के प्रमुख कारण
जनकल्याणकारी योजनाएं: ‘लाड़ली बहना योजना’ जैसी योजनाओं पर हर महीने लगभग ₹1,850 करोड़ से अधिक की राशि खर्च हो रही है।
विकास और इंफ्रास्ट्रक्चर: सरकार का तर्क है कि सड़क, पुल, निवेश और औद्योगिक विस्तार के लिए ऋण आवश्यक है।
विरासत में मिला कर्ज: मौजूदा सरकार को लगभग ₹3.5 लाख करोड़ का कर्ज पूर्ववर्ती सरकार से मिला था, जिस पर ब्याज और नई उधारी जुड़ती गई।
⚖ सरकार बनाम विपक्ष
सरकार का दावा है कि राज्य की जीएसडीपी वृद्धि दर 14–15% के आसपास है और कर्ज वित्तीय नियमों की सीमा में है।
वहीं विपक्ष का आरोप है कि सरकार “घी पीकर कर्ज लेने” की नीति पर चल रही है और राज्य को भविष्य के आर्थिक संकट की ओर धकेल रही है।
आज 18 फरवरी 2026 को वित्त मंत्री विधानसभा में नया बजट पेश करने जा रहे हैं। अब सबकी निगाहें इस पर हैं कि सरकार कर्ज प्रबंधन की क्या रणनीति सामने रखती है।
क्या यह कर्ज विकास की सीढ़ी है या भविष्य का वित्तीय जाल? जवाब अब बजट दस्तावेजों में तलाशा जाएगा।
मध्य प्रदेश का ‘रोलिंग’ बजट: दूरदर्शिता या आंकड़ों की बाज़ीगरी?
सरकार इसे “ऐतिहासिक” और “इनोवेटिव” बता रही है… लेकिन सवाल यह है कि क्या यह सच में भविष्य की ठोस योजना है या फिर आंकड़ों का आकर्षक पैकेज?
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भारत का पहला ‘रोलिंग बजट’ – मास्टरस्ट्रोक या मैनेजमेंट की मजबूरी?
मध्य प्रदेश अब खुद को देश का पहला राज्य बता रहा है जिसने तीन साल का रोलिंग बजट पेश किया है।
मतलब — सिर्फ 2026-27 ही नहीं, बल्कि 2027-28 और 2028-29 का भी अनुमानित खाका तैयार।
सरकार का तर्क है कि इससे लंबी अवधि की योजनाओं को स्थिर फंडिंग मिलेगी।
लेकिन असली परीक्षा तब होगी जब अगले दो सालों में ये अनुमान कागज़ से ज़मीन तक उतरेंगे।
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🔴 बजट का आकार बड़ा, जिम्मेदारी उससे भी बड़ी
कुल बजट: करीब ₹4.65 से ₹4.80 लाख करोड़
पिछले साल से लगभग 10-12% की बढ़ोतरी
पूंजीगत व्यय (Capex) में रिकॉर्ड आवंटन
कोई नया टैक्स नहीं
सरकार ने राहत की बात कही है कि नया कर नहीं लगाया गया।
लेकिन बड़ा सवाल — क्या बिना नया टैक्स लगाए इतनी बड़ी योजनाओं का वित्तीय अनुशासन बना रहेगा?
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🔴 फोकस क्षेत्र – घोषणाएं बनाम हकीकत
महिला सशक्तिकरण
लाड़ली बहना योजना जारी रहेगी, हर जिले में महिला छात्रावास का लक्ष्य।
योजना लोकप्रिय है, लेकिन वित्तीय स्थिरता कितने साल टिकेगी?
रोजगार
50,000 सरकारी नौकरियों का लक्ष्य और स्किल डेवलपमेंट पर जोर।
क्या यह लक्ष्य भर्ती कैलेंडर में बदलेगा या सिर्फ भाषणों तक सीमित रहेगा?
सिंहस्थ 2028 (उज्जैन)
आगामी सिंहस्थ के लिए ₹20,000 करोड़ का विशेष प्रावधान।
आस्था के महाकुंभ को भव्य बनाने की तैयारी — लेकिन पारदर्शिता सबसे बड़ी कसौटी होगी।
स्वास्थ्य
जिला अस्पताल अपग्रेड, आयुष्मान का विस्तार।
जमीनी सच्चाई: कई अस्पतालों में अभी भी डॉक्टरों की कमी।
कृषि और AI
खेती में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग बढ़ाने की बात।
डिजिटल खेती का सपना अच्छा है, पर क्या छोटे किसान तक तकनीक पहुंचेगी?
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🔴 तकनीकी प्रयोग या वित्तीय प्रयोगशाला?
सरकार ने जीरो-बेस्ड बजटिंग लागू करने की बात कही है।
हर विभाग को अब अपने खर्च का सामाजिक-आर्थिक औचित्य बताना होगा।
साथ ही, सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 के जरिए हाई-टेक निवेश आकर्षित करने का दावा।
मध्य प्रदेश को औद्योगिक मानचित्र पर नई पहचान दिलाने की कोशिश।
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🔴 बड़ा लक्ष्य – 2029 तक ₹27.2 लाख करोड़ GSDP
सरकार का लक्ष्य है कि 2029 तक राज्य की जीडीपी ₹27.2 लाख करोड़ हो जाए।
आंकड़े महत्वाकांक्षी हैं।
लेकिन विकास सिर्फ ग्राफ से नहीं, रोज़गार, आय और जमीनी सुविधाओं से मापा जाता है।
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यह बजट बड़ा है, साहसिक है, और भविष्य की बात करता है।
पर असली सवाल यही है —
क्या यह “रोलिंग बजट” विकास को रफ्तार देगा
या फिर यह भी फाइलों में घूमता हुआ एक और “रोलिंग वादा” बनकर रह जाएगा?
मध्य प्रदेश की जनता अब घोषणा नहीं, डिलीवरी देखना चाहती है।
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