छह माह से वेतन लंबित!
सेवा सहकारी समिति बसुरिया पर गंभीर आरोप?
सेवा सहकारी समिति बसुरिया एक बार फिर सवालों के घेरे में है। समिति से जुड़े विक्रेताओं का आरोप है कि पिछले छह महीने से उनका वेतन भुगतान नहीं किया गया है, जिससे उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
“काम पूरा लिया जा रहा है, लेकिन मेहनताना रोका जा रहा है… आखिर क्यों?”
🔴 वेतन अटका, जवाब नदारद
विक्रेताओं का कहना है कि बार-बार निवेदन के बावजूद भुगतान नहीं किया गया। सवाल यह है कि जब जिम्मेदारी से कार्य कराया जा रहा है, तो भुगतान में यह देरी क्यों?
🧵 वारदाना के नाम पर अतिरिक्त वसूली?
आरोप यह भी है कि जूट वारदाना और प्लास्टिक वारदाना के नाम पर निर्धारित राशि से अधिक रकम ली जा रही है। यदि यह सही है, तो यह दोहरा बोझ है—एक ओर वेतन लंबित, दूसरी ओर अतिरिक्त वसूली।
क्या वारदाना की दरें सार्वजनिक हैं? क्या अतिरिक्त राशि का कोई अधिकृत आदेश है?
⚖️ प्रशासन की भूमिका पर नजर
विक्रेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र भुगतान नहीं हुआ तो वे उच्च अधिकारियों से सामूहिक शिकायत करेंगे। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है।
बसुरिया में उठी यह आवाज अब दबने वाली नहीं — मेहनतकशों का हक समय पर मिलना ही चाहिए।
