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✦ विचार विशेष ✦

श्रद्धा और विश्वास पर एक गंभीर दृष्टि

श्रद्धा का खो जाना क्या है?

श्रद्धा का खो जाना का अर्थ है — किसी व्यक्ति के भीतर से विश्वास, आस्था, भरोसा और समर्पण की भावना का धीरे-धीरे या अचानक समाप्त हो जाना।

श्रद्धा क्या है?

श्रद्धा वह भाव है जहाँ भय नहीं, बल्कि विश्वास होता है। जहाँ तर्क से अधिक अनुभव बोलता है और मन किसी विचार, व्यक्ति, संस्था या ईश्वर से जुड़ाव महसूस करता है।

श्रद्धा आँख बंद करके मानना नहीं, बल्कि मन से स्वीकार करना है।

श्रद्धा क्यों टूटती है?

जब बार-बार धोखा, अन्याय, पाखंड दिखाई देता है, जब कथनी और करनी में गहरा अंतर नज़र आता है, तब मन सवाल करने लगता है।

उम्मीदें टूटती हैं और भीतर से एक आवाज़ उठती है —

“अब विश्वास करने लायक कुछ बचा नहीं।”

इसके प्रभाव

  • निराशा और मोहभंग
  • प्रश्न करने की प्रवृत्ति
  • व्यवस्था से दूरी या विद्रोह
  • भीतर का खालीपन

क्या श्रद्धा का खो जाना गलत है?

नहीं। कई बार यह आँख खुलने की प्रक्रिया होती है। यह व्यक्ति को अंधविश्वास से विवेक की ओर ले जाती है।

श्रद्धा मरती नहीं, स्थान बदलती है। जो झूठी होती है, वही टूटती है।

सच्ची श्रद्धा अक्सर टूटने के बाद और अधिक परिपक्व होकर लौटती है।

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