बैंक में कुत्ता घुसा, इंसान लाइन में खड़ा रहा!
सालीचौका में आज बैंक नहीं, सिस्टम का एक्स-रे हो गया। लाइन में इंसान पसीना बहा रहा था और एक कुत्ता बिना टोकन, बिना पहचान सीधे बैंक के अंदर टहलता नजर आया।
न कोई सवाल, न कोई रोक-टोक। और जब लोगों ने आंखें फाड़कर देखा तो साथ आई महिला ने ऐसा डायलॉग मारा कि गार्ड, नियम और मैनेजर—सब साइलेंट मोड में चले गए।
बस! इसके बाद बैंक के सारे नियम ऐसे गायब हुए जैसे नेटवर्क आते ही ई-अटेंडेंस की फोटो।
कुत्ता ऐसे शांति से बैठा था मानो कह रहा हो— “मैं VIP हूं, तुम लोग लाइन में ही रहो।”
इंसान आधार, पैन और फोटो लेकर खड़ा, और कुत्ता बिना कुछ दिखाए अंदर! लोगों ने धीरे से कहा—
गार्ड की हालत: नियम बनाम मैडम
गार्ड सोच में पड़ गया—
इसे बाहर निकालूं तो मैडम नाराज़,
और रहने दूं तो नियम नाराज़।
आख़िर में उसने वही किया, जो सिस्टम अक्सर करता है— कुछ नहीं!
कुत्ता क्या सोच रहा था?
- “इनको रोज़ बुलाते हैं, फिर भी काम नहीं होता”
- “भौंकूंगा तो सिक्योरिटी आएगी”
- “चुप रहूंगा तो VIP समझेंगे”
और भाई साहब, चुप रहकर VIP बन भी गया!
निष्कर्ष (जनभावना)
यहां आदमी होना काफी नहीं,
“अपना” होना ज़रूरी है!
सालीचौका में आज यह साबित हो गया कि—
खाता खुले या न खुले,
लेकिन अगर डायलॉग सही हो,
तो कुत्ता भी बैंक पहुंच सकता है!
