ट्रेन में "इश्क़ की तपिश" ने बढ़ाया पारा! @Gotegaon #श्रीधाम
गर्मी वैसे ही तेज थी ऊपर से इश्क़ की गर्माहट ने माहौल को और भी "तपता" बना दिया।
सीट पर फैला बदन, कंधों पर गिरती चादर और बोगी में पसरा खामोश इश्क़!
यह देखकर कुछ यात्रियों ने करवट बदल ली और कुछ मोबाइल में व्यस्त हो गए लेकिन नजरें बार-बार वहीं जा रही थीं!
ट्रेन की बोगी, नीली सीट और रात का सफर — और उसी बीच एक युवा जोड़ा ऐसा खोया कि जैसे पूरी दुनिया ही गायब हो गई हो।
कभी चादर सरकती, कभी कंधों पर सिर तो कभी सीट पर फैली नज़दीकियां!
बोगी में बैठे यात्रियों ने पहले नजरें चुराईं और फिर हल्की मुस्कानें भी दिखीं लेकिन कुछ ही देर में माहौल "असहज" से "अजीब" होने लगा।
मुद्दा मोहब्बत नहीं… मर्यादा का है
सवाल यह नहीं कि मोहब्बत गलत है, सवाल यह है कि क्या सार्वजनिक सफर को "निजी पल" बना देना सही है?
सोशल मीडिया पर तस्वीरें सामने आते ही लोगों ने कहना शुरू कर दिया —
"गर्मी में सफर और सफर में इश्क़... लेकिन मर्यादा भी कोई चीज होती है"
क्योंकि ट्रेन निजी कमरा नहीं, सार्वजनिक सफर है!
आप क्या सोचते हैं?
सार्वजनिक जगह पर ऐसी नज़दीकियां — सही या गलत?
सार्वजनिक जगह पर ऐसी नज़दीकियां — सही या गलत?
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