https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEi_nXYDircpji_NBp4Y2oyo8rhVeU-DuXusJaP3AW8


 


 


 

STRINGER24NEWS

सत्य और समाज के बीच की कड़ी

सरपंच पति–सचिव की साजिश ने पंचायत को बनाया लूट का अड्डा!

गोटेगांव जनपद की ग्राम पंचायत चांदनखेड़ा में गबन का संगठित मॉडल उजागर


ग्राम पंचायत चांदनखेड़ा में जो कुछ सामने आ रहा है, वह न तो लापरवाही है, न ही कागजी भूल — बल्कि यह सरकारी धन को ठिकाने लगाने की पूरी तरह से रची गई आपराधिक साजिश प्रतीत होती है।

सरपंच पति और पंचायत सचिव की जोड़ी ने पंचायत को निजी एटीएम में तब्दील कर दिया, जहां से पैसे की निकासी योजनाबद्ध तरीके से की गई।

यहां सवाल विकास का नहीं, लूट के बंटवारे का है।

महिला सरपंच सिर्फ मुखौटा?

महिला सशक्तिकरण के नाम पर चांदनखेड़ा पंचायत में सबसे बड़ा मज़ाक किया गया।

न महिला सरपंच पंचायत कार्यालय आती हैं, न उन्हें किसी बिल, भुगतान या कार्य की जानकारी है — लेकिन हर फाइल पर हस्ताक्षर मौजूद हैं

क्या महिला सरपंच को जानबूझकर अंधेरे में रखा गया? या वे खुद इस खेल का हिस्सा हैं?

संदिग्ध भुगतान: चार नाम, अनगिनत सवाल

Stringer24 News के पास मौजूद बिल और भुगतान दस्तावेज स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि कुछ चुनिंदा व्यक्तियों के नाम पर लगातार और भारी भुगतान किया गया।

  • सरल सेन
  • रूपल विश्वास
  • महेंद्र
  • मनोज

इन नामों के अंतर्गत दिखाए गए भुगतान न कार्य की प्रकृति से मेल खाते हैं, न ही पंचायत की वास्तविक जरूरतों से।

एक जैसे नाम, एक जैसा भुगतान पैटर्न — यह संयोग नहीं, संकेत है।

स्टेशनरी के नाम पर खुला गबन!

स्टेशनरी और अन्य विविध खर्चों के नाम पर ऐसे बिल लगाए गए जिनमें मात्रा, दर और उपयोग जमीन से कोसों दूर नजर आते हैं।

कई बिलों में ऐसा दर्शाया गया है मानो पंचायत कार्यालय कागजों का गोदाम बन गया हो — जबकि हकीकत में वहां न रजिस्टर दिखते हैं, न सामग्री

सबसे अहम तथ्य यह है कि — ये सभी बिल, वाउचर और भुगतान प्रविष्टियां साक्ष्य के रूप में सुरक्षित हैं।

जनपद पंचायत की भूमिका भी संदेह के घेरे में

इतने बड़े स्तर पर संदिग्ध भुगतान बिना जनपद पंचायत की मौन सहमति संभव नहीं माने जा सकते।

बिल पास हुए, भुगतान निकले — लेकिन न भौतिक सत्यापन, न स्थल निरीक्षण, न आपत्ति।

क्या जनपद कार्यालय भी इस गबन श्रृंखला की अंतिम कड़ी है?

अब मामला सीधे कलेक्टर तक

Stringer24 News के पास मौजूद तथ्य, नाम और दस्तावेज अब जिला कलेक्टर एवं जिला पंचायत अधिकारी के समक्ष औपचारिक साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किए जाएंगे।

यह मामला अब केवल जांच का नहीं, आपराधिक कार्रवाई का बन चुका है।

अगर इस बार भी कार्रवाई नहीं हुई, तो सवाल प्रशासन की नीयत पर उठेगा।

Stringer24News चेतावनी देता है — यह सिर्फ शुरुआत है। अगली कड़ी में बिल नंबर, तिथि, राशि और जिम्मेदार हस्ताक्षर सार्वजनिक किए जाएंगे।

© Stringer24 News | सत्य और समाज के बीच की कड़ी

أحدث أقدم

📻 पॉडकास्ट सुनने के लिए यहां क्लिक करें।

🎙️ Stringer24News Podcast

🔴 देखिए आज का ताज़ा पॉडकास्ट सीधे Stringer24News पर