नरसिंहपुर। जिले के बाजारों में इन दिनों सीताफल की जबरदस्त आवक देखी जा रही है। दीपावली पूर्व से ही बाजारों में इसकी बिक्री शुरू हो गई है, जो करीब एक माह तक जारी रहती है। इस बार पहाड़ी इलाकों में सीताफल की पैदावार अधिक होने के कारण हर मंडी में इसकी अच्छी खपत देखी जा रही है।
ग्रामीण क्षेत्रों से रोज सुबह ग्रामीण सीताफल लेकर शहर पहुंचते हैं। सुबह के समय इनकी कीमतें 50 से 60 रुपये प्रति किलो तक रहती हैं, जबकि शाम ढलते-ढलते यह भाव घटकर 15 से 20 रुपये प्रति किलो तक पहुंच जाता है। बरहेटा (गोटेगांव) और सतपुड़ांचल (गाडरवारा) की पहाड़ियों में बिना पानी के पैदा होने वाला यह फल ग्रामीणों के लिए महीनेभर का रोज़गार भी बन गया है।
ग्रामीण बताते हैं कि शाम के समय वे पहाड़ों से सीताफल तोड़कर लाते हैं और सुबह शहर में आकर बेचते हैं। इससे उनके घर का चूल्हा जलता है और त्योहारों के समय कुछ अतिरिक्त आमदनी भी हो जाती है।
सीताफल के गुणकारी फायदे — सीताफल को धार्मिक और औषधीय दोनों दृष्टि से फलदायक माना गया है। दीपावली के अवसर पर इसे लक्ष्मी पूजन में शामिल करने से माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। यह घर में सकारात्मक ऊर्जा लाने और आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में सहायक माना गया है।
स्वास्थ्य की दृष्टि से यह फल अत्यंत गुणकारी है। इसमें प्रोटीन, कैल्शियम, सोडियम और कई प्रकार के विटामिन होते हैं, जो शरीर में ताकत और खून की कमी को पूरा करते हैं। इसके अलावा सीताफल में पाए जाने वाले पोटेशियम और मैग्नीशियम ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने तथा दिल की धड़कन को सामान्य बनाए रखने में मदद करते हैं।
इसके बीज और पत्ते भी उपयोगी हैं। बीज का लेप बालों में जूं को खत्म करता है, जबकि पत्तों का रस बालों में लगाने से गंजापन दूर करने में लाभदायक होता है। साथ ही अस्थमा, ब्लड प्रेशर और कमजोरी से जूझ रहे लोगों के लिए भी यह फल औषधि के रूप में काम करता है।
स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि इस बार पहाड़ी इलाकों में पर्याप्त उत्पादन हुआ है, जिससे अगले कुछ हफ्तों तक बाजार में सीताफल की भरपूर उपलब्धता बनी रहेगी।
