आप सोच रहे होंगे कि रोज सिर्फ हेल्थ अपडेट दे रहा हूं,खबर नहीं बना रहा हूं!लेकिन क्या करूं जब एक पत्रकार के भीतर जब साँसों की डोर उखड़ने लगती है, तो उसकी रिपोर्टिंग पर एक गहरा सन्नाटा उतर आता है।
एक लेखक या रिपोर्टर के लिए दूसरों की मुसीबत दिखाना आसान होता है, लेकिन जब खुद पर बनती है और जेब का हाल बेहाल हो, तब समझ आता है कि असल स्ट्रगल क्या होता है। डॉक्टर ने कुछ शुरुआती जांचें लिखी हैं, जिनका खर्चा देखकर दिमाग घूम रहा है
चेस्ट एक्स-रे (खर्च: ₹300 से ₹600)
स्पाइरोमेट्री या PFT (खर्च: ₹500 से ₹1,200)
TLC / DLC / WBC (खर्च: ₹300 से ₹700)
Sputum Examination (खर्च: ₹200 से ₹500)
इन जांचों के अलावा नागपुर तक का वह सफर है, जो बस या ट्रेन की जनरल बोगियों से होकर गुजरता है। वहाँ डॉक्टर की मेज पर रखी जाने वाली ₹800 से ₹1,500 की फीस है, और फिर उन दवाओं (₹700 से ₹1,500) के पन्ने हैं, जिन्हें खाने से ही सुबह का सूरज नसीब होगा।
कुल मिलाकर यह पूरा खर्च आठ से दस हजार रुपये के आसपास बैठ रहा है, जो पहले ही एक माह से लगातार इलाज कराने के बाद फिलहाल मेरे बजट से कोसों दूर है
एक ऐसे इंसान के लिए जो बरसों से सिर्फ लोगों की आवाज बनकर जीया हो, अपने ही इलाज के लिए यह पन्ने पलटना और इस तरह से हिसाब जोड़ना एक अजीब किस्म की लाचारी है।
हमने हमेशा सिखाया है कि सवाल पूछना चाहिए। आज खुद से सवाल पूछ रहा हूँ कि क्या एक लेखक, एक स्थानीय पत्रकार का हक सिर्फ हाशिए पर धकेल दिए जाने का है?
आज पहली बार, इस Stringer24News के शोर के बाहर खड़े होकर, मैं अपने पाठकों और उन तमाम हमदर्द चेहरों की तरफ देख रहा हूँ जो बरसों से मेरी खबरों के साथ खड़े रहे हैं।
जिंदगी भर मैंने आपकी आवाज बनने की कोशिश की है। आज पहली बार अपने लोगों के सामने खुलकर खड़ा हूँ। हमेशा ही सच्चाई लिखने और दूसरों की मदद की गुहार लगाने का काम किया है। आज पहली बार खुद कलम को रोककर अपने ही पाठकों और मित्रों के सामने सहयोग की अपील कर रहा हूँ।
अगर आप में से कोई भी भाई, दोस्त या फॉलोअर इस टफ टाइम में मेरी इस मेडिकल जर्नी और नागपुर के इलाज में थोड़ा बहुत भी सपोर्ट (स्वेच्छा से सहयोग) करना चाहता है, तो आप सीधे मुझसे इनबॉक्स में या व्हाट्सएप के माध्यम से बात कर सकते हैं।
