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सत्य और समाज के बीच की कड़ी

नरसिंहपुर के फरिश्ते-जिनकी वजह से आज मैं जिंदा हूं!

दोस्तों,

सोशल मीडिया पर अक्सर हम रील्स, खबरें और अपनी जिंदगी की अच्छी तस्वीरें शेयर करते हैं। लेकिन कभी-कभी जिंदगी का पासा ऐसा पलटता है कि सब कुछ थम जाता है।

जिंदगी और मौत के बीच का सफर कितना अनिश्चित होता है, इसका अहसास मुझे हाल ही में तब हुआ जब कुदरत ने मेरा कड़ा इम्तिहान लिया।

19 तारीख की रात लिवर के इलाज के लिए परिवार के साथ भोपाल जा रहा था। तभी बरेली के आगे अचानक ड्राइवर को झपकी क्या आई, मानो मौत ठीक सामने आ खड़ी हुई। कार दो बार हवा में पलटी और डिवाइडर से टकराकर चकनाचूर हो गई। बमुश्किल जान बचाकर किसी तरह बरेली से नरसिंहपुर पहुँच पाया।

जब इंसान ऐसे चौराहे पर खड़ा हो जहाँ जिंदगी और मौत का फैसला हो रहा हो, तब उसे अपनों की, समाज की और इंसानी रिश्तों की असल कीमत समझ आती है।

सच कहूँ तो मुझे उम्मीद नहीं थी कि इस तरह का तूफान मेरी जिंदगी में आएगा। जब मैंने फेसबुक पर इस हादसे का जिक्र किया, तो नरसिंहपुर के लोगों ने जो किया, उसने मेरी आँखें नम कर दीं।

बिना मांगे, खुद लोगों ने फोन-पे नंबर और QR स्कैनर माँगा। जिसे जो बन पड़ा, उसने मेरी मदद की—और यह साथ आज भी थमा नहीं है। जब अपने पराये सब दूर दिखते हैं, तब ऐसे 'फरिश्ते' भगवान बनकर सामने आते हैं।

आप सभी की दुआओं और डॉक्टरों के इलाज से लिवर में अब काफी सुधार है। हालांकि, पसलियों और दिल (हार्ट) में कुछ समस्या महसूस हो रही है, जिसका उपचार अभी भी जारी है।

अनेक लोगों ने अपना नाम जाहिर न करने का अनुरोध करते हुए कहा,

"न हम नेता हैं और न समाजसेवी, हम तो बस इंसानियत के नाते आपकी मदद कर रहे हैं, इसे व्यक्तिगत रखिएगा।"

आज भी लगातार कई लोगों के फोन और संदेश आते हैं, जिनमें कहा जाता है कि,

"हमें पता है आपको फील्ड पर वापस लौटने के लिए भी सहायता की जरूरत होगी, बेझिझक बताइएगा, जो भी हो सकेगा हम आपके लिए करेंगे।"

कलम और स्याही से लोगों के हक की आवाज उठाते-उठाते कभी यह अंदाजा नहीं था कि जिंदगी खुद जब इम्तिहान लेगी, तो ये समाज मुझे इतना बेइंतहा प्यार, सम्मान और आत्मीयता से सींच देगा! ऐसा समर्थन तो मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था।

एक लेखक और पत्रकार के रूप में लोगों से मिलने वाले इस अपार प्यार, सम्मान और सहयोग को लेकर कि ऐसा समर्थन उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा था।

मैं तह-ए-दिल से शुक्रिया अदा करना चाहता हूँ नरसिंहपुर के उन तमाम रियल-लाइफ हीरोज़ का, जिनकी वजह से आज मैं सांस ले रहा हूँ। आपका यह एहसान मैं कभी नहीं भूल पाऊंगा।

बस अपना यह प्यार और दुआएँ बनाए रखिए, इस जंग को भी पूरी तरह जीत कर जल्द लौटूँगा!
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