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*मित्रता की छाँव* 

कुछ रिश्ते ख़ून से नहीं जुड़ते,

पर दिल के बहुत करीब होते हैं,

बिना कहे सब समझ जाते हैं,

वो सच्चे दोस्त ही तो होते हैं।

ना कोई स्वार्थ, ना कोई चाह,

बस साथ निभाने की होती है राह,

कभी हँसी, कभी आँसू बाँटते हैं,

हम ज़िंदगी इन्हीं के संग काटते हैं।

जब राहें मुश्किल हो जाती हैं,

और उम्मीदें भी सो जाती हैं,

तब एक आवाज़ आती है दिल से,

“मैं हूँ ना” — ये ताक़त बन जाती है।

वक़्त चाहे जितना भी बदल जाए,

असली दोस्त कभी नहीं बदल पाए,

उनकी बातों में जादू होता है,

हर दर्द में भी सुकून होता है।


तो चलो आज इस मित्रता दिवस पर,

उन दोस्तों को दिल से धन्यवाद कहें,

जिन्होंने हमारे जीवन को रंग दिया,

और हर मोड़ पर संग दिया।

*मित्रता दिवस की सभी मित्रों को शुभकामनाएं*

शुभैच्छुःअवधेश चौकसे पत्रकार

उपरोक्त कविता/लेख पत्रकार अवधेश चौकसे द्वारा stringer24news के साथ साझा किया गया 

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