*सरपंच की कुर्सी छिनने की कोशिश कितनी सफल और कितनी असफल?: ग्राम रांकई:जनपद करेली:नरसिंहपुर*
रांकई ग्राम पंचायत में चल रही उथल पुथल महज एक नूरा कुश्ती के अलावा कुछ नहीं है, उप सरपंच और पंचों ने अपनी राह का कांटा निकालने के लिए सरपंच सुनीता को अपने निशाने पर लिया। उप सरपंच ने अपने समर्थक पंचों के साथ मिलकर जनपद पंचायत अधिकारियों से कई बार सरपंच सुनीता की शिकायत की और आरोप लगाया कि, सुनीता पंचायत में अपनी जिम्मेदारी नही निभा रही हैं और इस वजह को मुख्य आधार बनाकर सुनीता को सरपंच पद से हटाने के लिए धारा 40 के तहत कार्यवाही किए जाने की मांग भी की गई।
अविश्वास प्रस्ताव को भी महिला सरपंचों के उत्पीड़न के रूप में उपयोग किया जाता है। सक्रिय महिला सरपंचों के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने एवं उनकी झूठी शिकायत के कई उदाहरण हमारे सामने हैं!कुछ इसी तर्ज पर उप सरपंच और पंच मिलकर रांकाई में अपना सिक्का चला रहे हैं!
क्या आपको लगता है कि, उप सरपंच फयाज मालगुजार सिर्फ सेवा के लिए पंचायत में दौड़ भाग कर रहा है? या फिर आप सोच रहे हैं कि, उप सरपंच द्वारा लगाए गए आरोप सच्चे हैं? क्या उप सरपंच की नियत में कोई खोट नहीं है? इन सवालों का जवाब जानने के लिए आपको मामले में थोड़ी गहराई में उतरना पड़ेगा।
तो सबसे पहले तो यहां पर यह स्पष्ट हो की, उप सरपंच फयाज मालगुजार और उसके सार्थक पंच सिर्फ सेवा के लिए पंचायत में इतनी दौड़ भाग नही कर रहे हैं और उप सरपंच व पंचों द्वारा सरपंच सुनीता पर लगाए जा रहे आरोप भी सच्चाई की कसौटी पर खरे नहीं उतर रहे हैं! झूठ का जो एक महल उप सरपंच फयाज ने खड़ा किया था, वह अब ढहने लगा है!
दरअसल उप सरपंच और उसके समर्थक पंचों सहित कुछ अन्य लोगो द्वारा अक्सर यह सवाल उठाया जाता है की,सुनीता रांकाई के सरपंच पद के लिए चुनाव लडने की कैसे और कब हकदार हुई, जबकि वे तो इस गांव की निवासी ही नहीं हैं!सवाल वाजीफ है, लेकिन इससे भी अहम बात यह है कि, चुनाव प्रक्रिया और मतदान के दौरान ये लोग क्या कर रहे थे?तब मुंह में दही क्यों जमा था?पहले अधिकारियों से पूछने की हिम्मत क्यों नहीं पड़ी? उप सरपंच तो साफ कहते ही हैं,की वे मामले से वाकिफ थे पर उन्होंने भी अपना विरोध दर्ज नही किया था, क्यों की शायद उस समय तक वो पंचायत चलाने की फील्डिंग बिठा चुके थे,और एक अंदरूनी समझौते के तहत कुछ पंच भी फयाज के समर्थन में आ गए थे।
इसके बाद उप सरपंच और पंचों द्वारा यह भी आरोप लगाया जाता है कि,सरपंच पंचायत भवन कार्यालय नहीं आती हैं, जिससे विकास में बाधा उत्पन्न हो रही है!
जब आप पूरे मामले की गहन विवेचना करते हैं तो पाते हैं की,सिर्फ सरपंच नहीं बल्कि अन्य महिला पंच भी कार्यालय उपस्थित होने में असमर्थ रहे! आख़िर इसकी मुख्य वजह क्या है?दरअसल पंचायत में पूरी तरह से पुरूषों का कब्जा है। अकेली महिला पुरुषों के बिच अपने आप को सुरक्षित माहौल में महसूस नहीं कर पाती है और ना ही पंचायत ने ऐसा कोई प्रयोग किया की महिलाएं खुश होकर स्वेच्छा से अपने दायित्वों का निर्वहन निष्ठापूर्वक कर सकें! बल्कि इसके विपरित उप सरपंच और पंचों ने हमेशा ही सरपंच को राजनीतिक प्रतिद्वंदिता के नजरिए से देखा और सरपंच के विरुद्ध शिकायतों की फेहरिस्त तैयार कर दी! ताकि वे अपनी कुटिल मंशा को पूरा कर सकें!
यह घटना हमारे सामाजिक ढाँच के,कानून व्यवस्था और प्रशासनिक तंत्र पर भी कई सवाल खड़े करती है। इतना ही नहीं बल्कि इसके साथ ही यह पंचायत और विकास में महिलाओं की भागीदारी के संघर्ष को उजागर करती है।
उप सरपंच फयाज मालगुजार और उसके समर्थक पंचों की करिस्तानियों की फेहरिस्त इतने पर ही खत्म नही हो जाती है, यह तो सिर्फ ट्रेलर है, पिक्चर तो अभी बाकी है!सबसे पहले सचिव भागचंद को निशाना बनाया गया, उप सरपंच और पंचों ने अपनी राह का यह रोड़ा जैसे तैसे अलग किया लेकिन जब लालच के इस खेल में उप सरपंच ने अपनी खुद की गांठ की कुछ रकम फसा दी तो भागचंद ने भी अपनी तरफ से पेंच डाल दिए, तब नौबत यह आ गई को, उप सरपंच कहने लगे की,भागचंद वापस आ जाए तो हमें कोई समस्या नहीं है। जैसे तैसे फयाज काजल की इस कोठरी से निकले ही थे कि फिर उप सरपंच और पंचों के इस खेमे ने अपना पुराना राग अलापना शुरू कर दिया की,अब जीआरएस जब यहां से जाएगा तब पंचायत का विकास होगा,और बड़ी की कुटिलता के साथ बड़े ही शतिराना अंदाज में इस पूरे मामले को अंजाम दिया गया और जीआरएस का ट्रांसफर अन्यत्र ग्राम में कर दिया गया।
कहते हैं कि, उप सरपंच ने जीआरएस को अपनी रंजिश के चलते ही निशाने पर लिया था,और मौके पर चौका मारते हुए बदला लेने की नियत से जीआरएस के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई का दबाव बनाया था! उप सरपंच के ही नक्शे कदम पर कुछ पंच भी चलने लगे हैं?अभी हाल ही में एक पंच बदला लेने की बात कर रहे थे,और वो बदला लेकर सोए हुए लोगों को जगाना चाहते हैं! या फिर किसी को हमेशा की नींद सुलाना चाहते हैं?
उप सरपंच और उसके समर्थक पंचों को निष्कंटक और निर्बाध राज चाहिए था?जिसके लिए घिनौनी साजिशें रची गई और अब ये लोग मिलकर सुनीता को सरपंची की कुर्सी छोड़ने के लिए दबाव बना रहे हैं? सरपंच पर एक और गम्भीर आरोप लगाकर!
दरअसल उप सरपंच और पंचों ने सुनीता पर कमीशन मांगने का आरोप भी लगाया! अब आप खुद ही सोचिए कि, क्या उप सरपंच फयाज मालगुजार और उसके समर्थक पंच ही सच्चे और ईमानदार हैं और बाकी पूरा गांव बेईमान? जाहिर सी बात है कि,सुनीता सीधे तौर पर ऐसी कोई मांग नही कर सकती है बिना यह देखे,जाने और समझे की उप सरपंच ने पंचायत में क्या जाल काल बिछा रखा है! संभावना है कि, सुनीता ने जब फयाज के कारनामों को समझ लिया तब उसने भी फयाज से पिंड छुड़ाने के लिए कमीशन की मांग रख दी और जिसमें वह काफी हद तक कामयाब भी हुई!
सुनीता का कहना सिर्फ इतना है की, जिस खरीदी की चर्चा मेरे सामने नही हुई,मुझे बिल और सामग्री का कोई भान ही नहीं तब ऐसे में बिना सोचे समझे कैसे किसी भी बिल बाउचर पर साइन कर दूं, भले ही उप सरपंच कितना भी दबाव बनाए मैं गलत बिलो पर साइन नही करूंगी!इसके बाद से ही उप सरपंच फयाज सुनीता के प्रति बैर रखने लगा? यदि ऐसा नहीं है तो फिर शिकायतों और कारनामों की ये फेहरिस्त क्या बयां कर रही है?