*चम्चे गायब,गमछें गायब*
*प्रकाशित रचना पत्रकार अवधेश चौकसे द्वारा stringer24news के साथ साझा किया गया।*
चम्चे गायब, गमछें गायब।
लाखों के रोजगार गयें।
भंडारे सब खत्म हुयें।।
सबके देव सुरधाम गये।
मदिरा आवंटन से उपजा।
भ्रम कलेश सब दूर हुआ।।
खत्म हुआ मतदान।
दर्प,अहम,सब चूर हुआ।।
परिणामों की माथापच्ची जारी है।
जीते चाहें जो भी हो लेकिन,
जनता, हरदम हारी हैं।
जनता हरदम, हारी हैं।।
*अवधेश चौकसे* पत्रकार
सालीचौका नरसिंहपुरः मप्र.