पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही बर्फबारी से जिले में भी ठंड का अहसास होने लगा है।ठंड बढ़ जाने से घर से बाहर निकलने वाले लोग अब पूरी बाजू के गर्म कपड़े पहने और शॉल ओढ़े नजर आ रहे हैं।ऐसा प्रतीत होता है जैसे शीत लहर के असर से जिले की रफ्तार सुस्त पड़ी हुई है। ग्रामीण अंचल में कड़कड़ाती ठंड में शीत लहर से बचने का सिर्फ आग ही बचाव का सहारा है। गर्म कपड़े पहनने के बाद भी ठंड से पीछा नहीं छूट रहा है। हालाकि जहां एक ओर लोग घरों से निकलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर सार्वजनिक स्थानों पर लोग चाय की दुकानों पर भट्ठियों के आसपास खड़े होकर चाय की चुस्कियां लेते हुए राजनीतिक और सम सामयिक मुद्दों पर चर्चा के साथ मौसम का लुत्फ उठा रहे हैं।
कड़कड़ाती ठंड के बावजूद 2022 के स्वागत के लिए शहरी और ग्रामीण अंचल के युवाओं में खासा उत्साह दिखाई दिया।
नव वर्ष को लेकर रेस्टोरेंट,ढाबों और होटलों पर भी विशेष तैयारियां की गई है।लोगों को बेहतर सर्विस प्रदान करने के लिए तैयारी की जा रही है।
घरों में भी गृहणियों द्वारा नव वर्ष पर स्वादिष्ट व्यंजन बनाने की तैयारी चल रही है।मंदिरों के साथ घरों में भी लोग पूजा अर्चना में जुटे हैं।
समाज सेवी कामथ नव वर्ष कि शुभकामनाओं के साथ संदेश देते हुए कहते हैं कि नव वर्ष उत्सव-पर्व के उल्लास में हमें फूहड़ता से बचने, दिखावटी आडम्बरों की नकारने और संस्कारों मूल्यों के संरक्षण करने वाले उत्सवों, पर्वों की गरिमा बनाए रखने का संकल्प अवश्य करना चाहिए।
ग्रहणी नलिनी शर्मा कहती हैं कि नव वर्ष उत्सव पर आधुनिकता के नाम पर फूहड़ता का चलन इतना बढ़ गया है कि युवाओं में यह भ्रांति घर कर गई है कि अगर हम चमकीली दुनिया की तड़क-भड़क में शामिल नहीं हुए तो मानों हमें कोई पूछेगा ही नहीं!