शौचालय बना, कर्ज बढ़ा, लेकिन सिस्टम की नींद नहीं खुली!
आज हम आपको लेकर आए हैं जबलपुर जिले के सिहोरा ब्लॉक के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत कचपुरा, जहाँ सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच एक गरीब परिवार की चीखें दम तोड़ रही हैं!
राजनयिकों और जिम्मेदारों के बड़े-बड़े विज्ञापनों के बीच जरा इस तस्वीर को गौर से देखिए। यह कहानी है सरस्वती चौधरी जी की, जिनके पति विक्रम चौधरी जी ने अधिकारियों के भरोसे पर 02 जून 2025 को अपने घर में शौचालय का निर्माण तो करवा लिया। उस वक्त उनसे कहा गया था कि निर्माण पूरा करो, 12,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि सीधे खाते में आ जाएगी।
लेकिन हुआ क्या?
महीनों बीत गए, चक्कर काट-काटकर जूते घिस गए, पर सरकार के पोर्टल पर यह फाइल आज भी 'WIP' (यानी पेंडिंग) स्थिति में अटकी हुई है! हालत यह है कि गरीब परिवार ने काम पूरा कराने के लिए ब्याज पर पैसे लिए थे, और आज नौबत यह आ गई है कि चुकाया गया ब्याज मूल प्रोत्साहन राशि से भी ज्यादा हो चुका है।
शिकायत नंबर: 41220900 (दिनांक: 22-10-2026)
विभाग: पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग (स्वच्छ भारत मिशन)
बैंक खाता: बैंक ऑफ़ महाराष्ट्र, शाखा सुकरी (खाता नंबर: 60153892011)
जब स्वच्छता अभियान के नाम पर करोड़ों के बजट का ढिंढोरा पीटा जाता है, तब ऐसे मामलों में जिला प्रशासन और पंचायत विभाग की यह सुस्ती क्या दर्शाती है? क्या एक गरीब को उसका हक पाने के लिए हर बार इस तरह की जद्दोजहद से गुजरना पड़ेगा?
गरीब परिवार ने ब्याज पर पैसे लेकर शौचालय का निर्माण कराया था, यह उम्मीद करते हुए कि शासन की ओर से तय प्रोत्साहन राशि समय पर मिल जाएगी। लेकिन महीनों चक्कर काटने और कर्ज के बोझ तले दबने के बावजूद, विभाग की सुस्त कार्यप्रणाली के कारण अब तक सहायता राशि खाते में नहीं पहुंची है। ब्याज की रकम मूल प्रोत्साहन राशि से भी अधिक हो चुकी है।
सवाल यह है कि क्या कागजी औपचारिकताओं और पोर्टल की 'WIP' प्रक्रिया के नाम पर गरीबों को यूं ही परेशान किया जाता रहेगा?
