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सत्य और समाज के बीच की कड़ी

क्या ठप्प हो जाएंगी नरसिंहपुर की शुगर मिलें? जानिए 28 अक्टूबर के इस ऐतिहासिक महासम्मेलन का सच!

आज हम बात कर रहे हैं मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर से उठी उस महा-हुंकार की, जिसने भोपाल से लेकर दिल्ली तक बैठे हुक्मरानों और शुगर मिल मालिकों के कान खड़े कर दिए हैं। गाडरवारा मंडी में मध्य प्रदेश गन्ना उत्पादक किसान सभा के बैनर तले जो जनसैलाब उमड़ा है, उसने साफ कर दिया है कि अन्नदाता अब आर-पार की लड़ाई के मूड में है।

आइए जानते हैं, आखिर क्यों भड़के हैं प्रदेश के किसान और क्या है उनकी वह चेतावनी, जिसने प्रशासनिक अमले में हड़कंप मचा दिया है।

मिल मालिकों द्वारा लगातार किए जा रहे आर्थिक शोषण, घटतौली के काले कारनामों और उनके पक्ष में खड़ी किसान-विरोधी सरकारी नीतियों के खिलाफ नरसिंहपुर जिले की गाडरवारा मंडी में मध्य प्रदेश गन्ना उत्पादक किसान सभा के तत्वावधान में एक अभूतपूर्व और विशाल राज्य-स्तरीय सम्मेलन संपन्न हुआ।

इस महासम्मेलन की अध्यक्षता नरसिंहपुर जिले के संयोजक बृजमोहन कौरव और राम सिंह वर्मा ने संयुक्त रूप से की। वहीं, मंच पर अखिल भारतीय गन्ना उत्पादक किसान सभा के राष्ट्रीय महासचिव पुष्पेंद्र त्यागी, अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय संयुक्त सचिव बादल सरोज (मुरैना), सहकारी शुगर मिल कैलारस के पूर्व डायरेक्टर गयाराम सिंह धाकड़, कृषि वैज्ञानिक सुभाष शर्मा (भोपाल), जितेंद्र आर्य (ग्वालियर) और मध्य प्रदेश किसान सभा के प्रदेश महासचिव अखिलेश यादव जैसे दिग्गज किसान नेता बतौर अध्यक्ष मंडल मौजूद रहे। कार्यक्रम में जिले भर के तमाम किसान संगठनों के नुमाइंदों और हजारों की संख्या में पहुंचे गन्ना उत्पादक किसानों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर एकता की जबरदस्त ताकत दिखाई।

सम्मेलन के मुख्य वक्ता के रूप में जब अखिल भारतीय गन्ना उत्पादक किसान सभा के राष्ट्रीय महासचिव पुष्पेंद्र त्यागी ने माइक संभाला, तो पूरा पंडाल किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ गूंज उठा। अपने उद्घाटन भाषण में उन्होंने देश भर के किसान आंदोलनों की मिसाल देते हुए बताया कि कैसे महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में उनका संगठन किसानों के अधिकारों की लड़ाई लड़ रहा है।

उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों पर सीधा हमला बोलते हुए कहा— केंद्र सरकारें शुगर मिलों के मोटे मुनाफे के लिए किसानों के खिलाफ नीतियां बनाकर उन्हें सरेआम ठगने का काम कर रही हैं। पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश की सरकारें जिस तरह किसानों को राज्य समर्थित मूल्य (SAP) देती हैं, मध्य प्रदेश सरकार उस तर्ज पर किसानों को उनका हक क्यों नहीं दे रही? मध्य प्रदेश का किसान अब ठगा नहीं जाएगा।

श्री त्यागी ने कर्नाटक के हालिया किसान आंदोलन का उदाहरण देते हुए याद दिलाया कि कैसे वहां के किसानों ने 12 घंटे तक नेशनल हाईवे जाम कर दिया था, जिसके बाद केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री को खुद किसानों के प्रतिनिधिमंडल को चर्चा के लिए बुलाना पड़ा और नीति निर्धारण में किसानों को शामिल करने का आश्वासन देना पड़ा। उन्होंने मध्य प्रदेश के किसानों से भी मिल स्तर से लेकर राष्ट्रीय राजधानी तक इसी तर्ज पर आर-पार का संघर्ष छेड़ने का आह्वान किया।

सम्मेलन में सिर्फ आवाज ही बुलंद नहीं हुई, बल्कि आगे की एक कठोर रणनीति भी तय कर ली गई। मध्य प्रदेश गन्ना उत्पादक किसान सभा के केंद्रीय कमेटी सदस्य जगदीश पटेल ने राज्यभर के संघर्ष की विस्तृत रिपोर्ट पेश करते हुए आगामी कार्ययोजना का ऐलान किया।

सम्मेलन में सर्वसम्मति से यह कड़े निर्णय लिए गए:

  • प्रदेश की हर एक शुगर मिल स्तर पर तत्काल प्रभाव से 11-11 जुझारू सदस्यों की टास्क टीमें बनाई जाएंगी, जो किसानों को गोलबंद करेंगी।
  • प्रशासन को मजबूर किया जाएगा कि वह किसानों के 24-सूत्रीय मांगपत्र पर बिंदुवार गंभीर चर्चा करे।
  • यदि इस सीजन में किसी भी शुगर मिल ने ₹600 प्रति क्विंटल से कम दाम पर गन्ने की खरीदी शुरू की, तो किसान चुप नहीं बैठेंगे—संबधित मिल के मुख्य गेट पर अनिश्चितकालीन तालाबंदी कर दी जाएगी!

सम्मेलन के बाद जब किसान अपनी मांगों और समस्याओं को प्रशासन तक पहुँचाने पहुंचे, तो प्रशासनिक रवैये ने आग में घी डालने का काम किया। किसानों ने मुख्यमंत्री, कलेक्टर और एसडीएम के नाम संबोधित 24-सूत्रीय मांगपत्र (जिसमें प्रमुख रूप से गन्ना उत्पादक किसानों की समस्याओं के समाधान और शोषणकारी 'ई-टोकन प्रणाली' को पूरी तरह समाप्त करने तथा निर्बाध बिजली प्रदाय सुनिश्चित करने की मांग शामिल थी) तहसीलदार अतुल कुमार श्रीवास्तव को सौंपा।

हालांकि, किसानों की मांग थी कि जिले के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी (एसडीएम स्तर के अधिकारी) खुद आकर उनका ज्ञापन लें, लेकिन जब कोई बड़ा अधिकारी मौके पर नहीं पहुँचा, तो किसानों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया। किसानों ने इस बात पर अपनी गहरी नाराजगी और रोष व्यक्त किया कि अधिकारी अन्नदाताओं की समस्याओं को लगातार नजरअंदाज कर रहे हैं। मंच से खुली चेतावनी दी गई कि यदि भविष्य में भी प्रशासनिक अधिकारियों का यही रवैया रहा, तो नरसिंहपुर ही नहीं बल्कि पूरे मध्य प्रदेश में एक बड़ा और विस्फोटक आंदोलन खड़ा किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

सम्मेलन के अंत में मध्य प्रदेश किसान सभा के प्रदेश महासचिव अखिलेश यादव ने समापन भाषण देते हुए घोषणा की कि किसानों के इस संघर्ष में किसान सभा हर स्तर पर चट्टान की तरह उनके साथ खड़ी है। साथ ही, इस ऐतिहासिक और सफल सम्मेलन को सफल बनाने में अपना तन, मन और धन समर्पित करने वाले सभी दूर-दराज से आए किसान भाइयों और साथियों का हृदय से आभार व्यक्त किया गया।

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