विधायक विश्वनाथ जी भूमियाढाना के इन रहस्यमयी बिलों का राज क्या है?
आज हम आपको ले चलते हैं चांवरपाठा के भूमियाढाना। वहाँ विधायक है विश्वनाथ जी। सुना है कि वे अपने क्षेत्र में घूमने से इतने व्यस्त हैं कि उन्हें फुर्सत ही नहीं मिलती कि वे पंचायत के बिलों पर भी अपनी आँखें टिका सकें। वैसे भी, आँखें टिकाने से फायदा क्या? जब लिखावट ऐसी हो जो नज़र ही न आए!
ज़रा कागज़ों के पन्नों को पलटिए और देखिए लोकतंत्र के इन 'कलाकारों' के कारनामे।
हमारे पास कुछ बिल हैं-
एक है 'MJ Material Supplier'। एजेंसी टाइप है— 'लघु दुकानदार'। बिल पेमेंट का स्टेटस गर्व से कह रहा है— 'Yes'। EPO नंबर है 3962694। लेकिन इसके पीछे की तस्वीर ऐसी धुंधली है, जैसे सच पर किसी ने धुएँ का पर्दा डाल दिया हो।
दूसरे साहब हैं 'SUNIL KUMAR NORIAYA'। एजेंसी टाइप लिखा है— 'जनसामान्य'। आम आदमी जनसामान्य होता है, पर जब उसका नाम बिल में आता है, तो वह खास कैसे हो जाता है? EPO नंबर 3962694 यहाँ भी चमक रहा है। पेमेंट हो चुका है, मगर क्या लिखा है, यह भगवान और वो दुकानदार ही जानते हैं।
और तीसरे हैं 'MR GOLU'। ये भी 'जनसामान्य' की श्रेणी में आते हैं। पेमेंट का स्टेटस 'Yes' है, नंबर भी दर्ज है, लेकिन पारदर्शिता इस कदर गायब है कि लगता है पूरा का पूरा सिस्टम ही चश्मे का नंबर बदलवाने की फिराक में है।
वैसे सच कहें तो इन बिलों को पढ़ना किसी आम इंसान के बस का नहीं है—इसके लिए तो कोई विशेष 'भ्रष्टाचार विशेषज्ञ' ही चाहिए जो धुएँ और कोहरे के बीच से मलाई की खुशबू सूंघ सके।
सोचिए, एक आम इंसान जो दिन-रात मेहनत करके टैक्स भरता है, पेट्रोल पर टैक्स देता है, आटे पर टैक्स देता है— उसकी खून-पसीना एक की हुई कमाई इन अदृश्य बिलों के ज़रिए किसकी जेब में जा रही है? क्या विधायक महोदय को यह सब कभी दिखाई नहीं देता? या फिर बात जब अपनी व्यवस्था की हो, तो निगाहें खुद-ब-खुद फेर ली जाती हैं?
सवाल यह नहीं है कि बिल में क्या लिखा है। सवाल यह है कि इस देश में 'फ्री की मलाई' खाने का यह लाइसेंस किसने जारी किया?
जब जनता पूछेगी कि हमारे हिस्से का विकास कहाँ गया, तो शायद यही धुंधले और अदृश्य बिल जवाब में पेश कर दिए जाएंगे।
