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किसान हित में प्रदेश स्तरीय आयोजन

गन्ना उत्पादक किसानों का प्रदेश स्तरीय सम्मेलन

गाडरवारा में 28 अक्टूबर को जुटेंगे किसान
बुधवार | 28 अक्टूबर 2026

सम्मेलन का आयोजन

स्थान : जवाहर कृषि उपज मंडी, गाडरवारा

आयोजक : मध्य प्रदेश गन्ना उत्पादक किसान सभा

मुख्य वक्ता : पुष्पेंद्र त्यागी, राष्ट्रीय महासचिव

संयुक्त विज्ञप्ति : बृजमोहन कोरव एवं राम सिंह वर्मा, जिला संयोजक

गन्ना किसानों एवं सभी किसान संगठनों से अपील

दलगत राजनीति से ऊपर उठकर अपने अधिकारों, उचित मूल्य और स्वाभिमान की रक्षा के लिए एकजुट हों।

मध्य प्रदेश गन्ना उत्पादक किसान सभा के जिला संयोजक बृजमोहन कोरव एवं राम सिंह वर्मा ने संयुक्त विज्ञप्ति जारी कर बताया कि आगामी 28 अक्टूबर 2026, बुधवार को जवाहर कृषि उपज मंडी, गाडरवारा में गन्ना उत्पादक किसानों का प्रदेश स्तरीय सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। इसमें प्रदेश के विभिन्न जिलों के गन्ना उत्पादक किसान प्रतिनिधि शामिल होंगे। सम्मेलन में राष्ट्रीय महासचिव पुष्पेंद्र त्यागी मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहेंगे।

किसान नेताओं के अनुसार, पिछले कई वर्षों से गन्ना उत्पादक किसान मिल मालिकों की नीतियों और विभिन्न व्यवस्थागत समस्याओं के कारण कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। किसानों का आरोप है कि उन्हें केवल आर्थिक नुकसान ही नहीं उठाना पड़ रहा, बल्कि उनके स्वाभिमान पर भी चोट पहुंच रही है। कई बार किसानों को मिल प्रबंधन के बजाय फील्डमैन और लेबर ठेकेदारों के सामने अपनी बात रखने के लिए मजबूर होना पड़ता है।

गन्ना किसानों की प्रमुख समस्याएं

1. गन्ने की तौल में पारदर्शिता का मुद्दा

किसान नेताओं ने बताया कि कई किसानों ने तौल कांटों की व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। किसानों की मांग है कि गन्ने की तौल पारदर्शी हो, ताकि उन्हें अपनी उपज का सही वजन मिल सके और किसी प्रकार की गड़बड़ी की आशंका न रहे।

2. एफआरपी निर्धारण के नियमों पर सवाल

विज्ञप्ति के अनुसार, पहले 8.5 प्रतिशत शुगर रिकवरी के आधार पर गन्ने के उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) का निर्धारण किया जाता था। बाद में यह आधार 2009 में 9.25 प्रतिशत और 2022-23 में 10.25 प्रतिशत कर दिया गया। किसान सभा का कहना है कि ऐसे बदलावों का गन्ना उत्पादकों को मिलने वाले मूल्य पर क्या प्रभाव पड़ता है, इस पर किसानों के हितों को ध्यान में रखकर विचार होना चाहिए।

3. गन्ने की किस्म और मूल्य निर्धारण

किसान नेताओं का आरोप है कि पहले अधिक वजन वाले गन्ने को प्राथमिकता मिलती थी, जबकि अब मिलों में अधिक शुगर रिकवरी देने वाली निर्धारित किस्मों पर जोर दिया जाता है। उनका कहना है कि गन्ने की किस्म और रिकवरी के आधार पर मूल्य तय करने की व्यवस्था में किसानों के आर्थिक हितों की भी रक्षा की जानी चाहिए।

4. मध्य प्रदेश में राज्य समर्थित मूल्य की मांग

किसान सभा के अनुसार, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में गन्ने के मिल मूल्य के अतिरिक्त राज्य समर्थित मूल्य (एसएपी) भी दिया जाता है। विज्ञप्ति में दावा किया गया है कि इससे किसानों को लगभग 50 से 75 रुपये प्रति क्विंटल तक अतिरिक्त राशि मिलती है। इसके विपरीत, मध्य प्रदेश में गन्ना किसानों को राज्य की ओर से अतिरिक्त मूल्य नहीं मिलने की शिकायत उठाई गई है।

5. गन्ना विकास निधि और कृषि सहायता

किसान नेताओं ने गन्ना विकास निधि के माध्यम से किसानों को बिना ब्याज सहायता, खाद, बीज, कीटनाशक और गन्ना उत्पादन के विकास के लिए सहयोग उपलब्ध कराने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि किसानों को इस प्रकार की सहायता का लाभ नहीं मिल पा रहा है और सरकार को इस व्यवस्था को प्रभावी बनाने की दिशा में कदम उठाने चाहिए।

6. गन्ने के उप-उत्पादों से होने वाले लाभ में हिस्सेदारी

गन्ने से चीनी के अलावा शीरा, खोई, इथेनॉल और बिजली जैसे उप-उत्पाद भी प्राप्त होते हैं। किसान सभा की मांग है कि इनसे होने वाले लाभ में गन्ना उत्पादक किसानों को भी उचित हिस्सेदारी दी जाए। विज्ञप्ति में दावा किया गया है कि एक क्विंटल गन्ने से मिलों को लगभग 1,375 रुपये की कमाई होती है। इस दावे के समर्थन में विस्तृत गणना या लागत का विवरण विज्ञप्ति में नहीं दिया गया है।

स्थानीय आंदोलनों से आगे, प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर एकजुटता जरूरी

किसान नेताओं का कहना है कि किसी एक मिल या सीमित क्षेत्र में आंदोलन करने से कुछ समस्याओं का समाधान तो हो सकता है, लेकिन गन्ना किसानों का व्यापक शोषण रोकने और किसान हितैषी नीतियां बनवाने के लिए संगठित प्रयास जरूरी हैं। इसके लिए प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर गन्ना उत्पादक किसानों को एक मंच पर लाकर संघर्ष को व्यापक रूप देना होगा।

सम्मेलन में राष्ट्रीय महासचिव पुष्पेंद्र त्यागी देशभर में गन्ना किसानों की स्थिति और उनकी समस्याओं पर विचार रखेंगे। साथ ही, किसानों को एकजुट करके सरकारों और मिल मालिकों के समक्ष अपनी मांगें प्रभावी ढंग से रखने तथा किसान हितैषी नीतियां लागू कराने के लिए सामूहिक संघर्ष की दिशा पर चर्चा की जाएगी।

नरसिंहपुर जिले के किसानों से विशेष अपील

नरसिंहपुर जिले के समस्त किसान संगठनों एवं गन्ना उत्पादक किसानों से अपील की गई है कि वे दलगत राजनीति से ऊपर उठकर अपने अधिकारों और स्वाभिमान की रक्षा के लिए मध्य प्रदेश गन्ना उत्पादक किसान सभा के मंच पर एकजुट हों और प्रदेश स्तरीय सम्मेलन में भाग लें।

जिले की प्रत्येक शुगर मिल से जुड़ी समस्याओं को एकत्रित किया जाए। गन्ने के उत्पादन से लेकर विक्रय, तौल और भुगतान तक आने वाली कठिनाइयों को सम्मेलन में रखा जाए, ताकि उनके समाधान के लिए शासन-प्रशासन और मिल प्रबंधन के स्तर पर ठोस रूपरेखा तैयार की जा सके और संगठित संघर्ष किया जा सके।

किसान एकता — किसान स्वाभिमान

उचित मूल्य, पारदर्शी तौल और किसान हितैषी नीतियों के लिए एकजुट हों।

दिनांक : 28 अक्टूबर 2026, बुधवार
स्थान : जवाहर कृषि उपज मंडी, गाडरवारा
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