रमपुरा में तो विकास का ऐसा "डबल इंजन" मॉडल चल रहा है जिसे देखकर नासा वाले भी हैरान हो जाएं!
आप सोच रहे होंगे कि मैं किसी सुपरमैन की बात कर रहा हूँ? जी नहीं। यह किसी फ़िल्म का स्क्रीनप्ले नहीं है। यह ज़मीनी हक़ीक़त है, नरसिंहपुर जिले से तेन्दूखेड़ा के ग्राम पंचायत रमपुरा की।
क्या आपने कभी किसी ऐसे इंसान को देखा है, जो सुबह पंप का वाल्व खोलता है, दोपहर में झाड़ू उठाता है, और शाम को जब घर लौटता है, तो दो-दो सरकारी पदों की पैसा उसके बैंक खाते में पहुंच जाता है?
मिलेगा एक ही बंदा— हीरालाल कुर्मी। लेकिन कारनामे? जरा सरकारी वाउचरों के दर्शन कीजिए।
24/08/2026 (वाउचर सं. 105): हीरालाल संभालते हैं, "पंप ऑपरेटर" की कमान और पंचायत से मानदेय उठाते हैं पूरे ₹12,000/-! 19/10/2026 (वाउचर सं. 127): अचानक हीरालाल "सफाई कर्मी" का अवतार ले लेते हैं और उसी पंचायत के खाते से ले जाते हैं ₹17,500/-!
खाता नंबर वही (2981707609), दस्तखत वही, बंदा वही, बस टोपी बदल जाती है!
"अब सवाल यह उठता है कि,
क्या रमपुरा पंचायत में रोजगार का अकाल पड़ गया है कि किसी और गरीब को काम नहीं दिया जा सकता?
क्या पंचायती राज के वित्तीय नियम और 'डबल रेमुनरेशन रूल' सिर्फ किताबों में बंद रखने के लिए हैं?
क्या तेन्दूखेड़ा जनपद और जिला पंचायत प्रशासन की आँखों पर पट्टी बंधी है, जो एक ही खाते में अलग-अलग पदों का पैसा धड़ल्ले से ट्रांसफर हो रहा है?
क्या हीरालाल के पास कोई ऐसी दैवीय शक्ति है कि वे एक ही समय में नल का वाल्व भी खोलते हैं और झाड़ू भी लगा लेते हैं?
क्या जनपद पंचायत तेन्दूखेड़ा और जिला पंचायत नरसिंहपुर के जिम्मेदार साहबान को यह 'जादू' दिखाई नहीं देता?
अगर एक ही कर्मचारी को हर मद का पैसा बांटना था, तो पंचायत में सचिव, सरपंच और पंचों की क्या जरूरत? पूरा गांव ही हीरालाल के भरोसे छोड़ दीजिए!
