नरसिंहपुर की पंचायतों को लूटा जा रहा है!आप चुपचाप तमाशा देखिए अपने गांव की बर्बादी का!
क्या आपकी गाढ़ी कमाई का पैसा इसी तरह कागजी गोलमाल की भेंट चढ़ने के लिए है? आज हम एक ऐसी पोल खोलने जा रहे हैं, जिसे देखकर आपके पैरों तले जमीन खिसक जाएगी।
बात हो रही है नरसिंहपुर जिले के जनपद साईखेड़ा के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत डुंगरिया की... जहाँ कागजों पर विकास हो रहा है या नहीं, यह तो राम जाने, लेकिन फर्जी बिलों का खेल और सरकारी तिजोरी पर डाका पूरी रफ्तार से जारी है।
हमारे हाथ लगे दस्तावेजों के मुताबिक, गडरवारा के 'आदित्य कंप्यूटर' से ग्राम पंचायत डुंगरिया के नाम पर कुछ ऐसे बिल काटे गए हैं, जिन्हें देखकर कोई भी आम इंसान सन्न रह जाए:
05 जून 2026- सिर्फ 'ऑनलाइन वर्क और प्रिंट' के नाम पर 9,000 रुपये गटक लिए जाते हैं।
17 जून 2026- एक बार फिर वही पुराना खेल—ऑनलाइन और प्रिंटिंग के नाम पर 6,500 रुपये का बिल फाड़ दिया जाता है।
21 मई 2026- इसी काम के लिए 3,500 रुपये और उड़ा दिए जाते हैं।
28 जुलाई 2026- फिर से 3,800 रुपये का एक और बिल पेश कर दिया जाता है।
मात्र कुछ महीनों के भीतर, सिर्फ चंद कागजी पन्नों और 'ऑनलाइन वर्क' के नाम पर हजारों-हजार रुपये पंचायत के खाते से बाहर की दुकानों की झोली में डाल दिए गए!"
लेकिन असली धमाका तो अब होता है! जरा इस दूसरे दस्तावेज को देखिए। एक तरफ पंचायत अपने सारे ऑनलाइन काम बाहर की दुकानों से करवा रही है और दूसरी तरफ 21 मई 2026 को ही, पंचायत के खाते से 'नेट रिचार्ज' के नाम पर दस हजार रुपये का आहरण कर लिया जाता है!
"और इस सब के सूत्रधार कौन हैं? चर्चा जोरों पर है कि जिला पंचायत अधिकारी श्री गजेंद्र नागेश जी की कार्यप्रणाली के साए में पंचायतों को इस तरह से दोनों हाथों से लूटा जा रहा है। अगर सिर्फ चार छोटे-छोटे बिलों में हजारों रुपयों का यह हेरफेर सामने आ रहा है, तो जरा सोचिए—अगर इस पंचायत के पूरे वित्तीय साल के बिलों और खातों की निष्पक्ष जांच करवा दी जाए, तो कितने बड़े-बड़े घपले और घोटाले बाहर निकलेंगे?
विकास के दावों की हवा कैसे निकलती है, यह ग्राम पंचायत डुंगरिया के ये बिल चीख-चीख कर गवाही दे रहे हैं। अब देखना यह होगा कि क्या इस खुलासे के बाद जिम्मेदार अधिकारी कोई कार्रवाई करते हैं, या फिर भ्रष्टाचार की इस आग पर पर्दा डाल दिया जाता है।"
जब बात जनता की मेहनत की कमाई को इस तरह बेदर्दी से लुटाने की हो, तो सवाल सिर्फ एक बिल का नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था का है। जनता के पसीने का पैसा इस तरह पानी की तरह बह रहा है और जिम्मेदार हाथ पर हाथ धरकर बैठे हैं।
