खमरिया सरपंच नाली के पैसे खा गया? बच्चों के हिस्से आया नरक!
पहली ही बारिश में ग्राम पंचायत खमरिया (जनपद पंचायत साईंखेड़ा) में बनी यह नाली धराशायी हो गई। यह साफ़ दिखाता है कि इसमें किस स्तर का घटिया मैटेरियल इस्तेमाल किया गया था और कितना बड़ा भ्रष्टाचार हुआ है। जनता का पैसा कैसे पानी में बह रहा है, यह तस्वीर उसकी गवाह है।
और अब इस दूसरी तस्वीर को देखिए। यह कोई खेत का रास्ता नहीं है, बल्कि बच्चे स्कूल जाने के लिए इसी जानलेवा कीचड़ और दलदल से गुजरने को मजबूर हैं। क्या इन बच्चों के कोई सपने नहीं हैं? क्या इन्हें पढ़ने का अधिकार नहीं है? 21वीं सदी के भारत में एक नेता के घर जाने वाली सड़क चकाचक होती है, और देश का भविष्य कीचड़ में रेंग रहा है।
यह तस्वीरें खस्ताहाल और घटिया निर्माण की एक दुखद और स्पष्ट तस्वीर पेश करती हैं। जिस तरह से कंक्रीट का स्लैब (ढक्कन) जमीन के कट जाने से नीचे गिरा हुआ है और रास्ता धंस गया है, वह कई गंभीर सवालों को जन्म देता है।
इन तस्वीरों के आधार पर, यह कहना कि यहाँ "अनाड़ी मिस्त्री" का काम हुआ है, पूरी तरह से सही है। वास्तव में, यह सिर्फ अनाड़ीपन नहीं, बल्कि उससे भी आगे की बात है। निर्माण में जो मुख्य खामियां नजर आ रही हैं, वे स्पष्ट करती हैं कि यह काम गुणवत्ताहीन क्यों है!
सबसे बड़ी गलती यह है कि नाले या रास्ते की दीवारों को जमीन में गहराई तक नहीं बनाया गया है! कच्ची मिट्टी पर सीधा निर्माण नहीं किया जा सकता!
भारी वर्षा होने पर पानी ने मिट्टी को आसानी से काट दिया और नाली की दीवारें या तो ढह गईं या उनके नीचे की मिट्टी खिसक गई, जिससे स्लैब गिर गया।जबकि एक सही नींव पानी के दबाव और कटाव को झेलने के लिए बनाई जाती है।
कंक्रीट का स्लैब टूटा हुआ और लटका हुआ दिखाई दे रहा है, उसमें लोहे की छड़ें या तार (मजबूती के लिए) का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं किया गया है, या फिर नाममात्र का किया गया है। अगर यह एक कंक्रीट का ढक्कन था, तो इसे इतना लचीला और मजबूत होना चाहिए था कि अपनी टूटी हुई अवस्था में भी वह टिका रहे, न कि पूरी तरह से बिखर जाए। यह भी संभव है कि कंक्रीट में सीमेंट और रेत का अनुपात गलत रहा हो, जिससे वह कमजोर और भुरभुरा हो गया।
यह पैसे की बर्बादी और जनता के जीवन के साथ खिलवाड़ का एक आदर्श उदाहरण है।
यह घटिया सामग्री और घटिया कारीगरी का एक घातक संयोजन है, जिसके परिणामस्वरूप यह संरचना पहली बड़ी चुनौती (बारिश) में ही विफल हो गई।
