मंत्री जी की थाली में गया विकास का पैसा?
देवनगर पंचायत में लाखों का खर्च, अब अवैध मिट्टी खनन पर भी उठे सवाल
गांव के विकास के लिए आने वाला पैसा आखिर कहां खर्च हो रहा है? क्या वह सड़कों, नालियों और विकास कार्यों में लग रहा है या फिर मंत्री जी की थाली सजाने में?
मामला ग्राम पंचायत देवनगर का है, जहां वर्ष 2025 में मंत्री जी के कार्यक्रम और भोजन व्यवस्था पर लाखों रुपये खर्च किए जाने का मामला सामने आया है।यह कोई राजनीतिक आरोप नहीं है, बल्कि पंचायत के सरकारी पोर्टल पर अपलोड किए गए बिल खुद इस कहानी को बयान कर रहे हैं।
जिस पैसे से गांव का विकास होना था, उसी पैसे से VIP मेहमाननवाज़ी की जा रही थी?
पोर्टल के दस्तावेज़ों ने खोली कहानी
पंचायत के ऑनलाइन पोर्टल में दर्ज बिलों के अनुसार मंत्री जी के कार्यक्रम के दौरान भोजन, स्वागत और अन्य व्यवस्थाओं के नाम पर भारी खर्च दिखाया गया है।
गांव के लोगों का कहना है कि जब पंचायत क्षेत्र में अभी भी सड़क, नाली और बुनियादी सुविधाओं की कमी है, तो विकास निधि से इस तरह का खर्च आखिर क्यों किया गया?
अब अवैध मिट्टी खनन का मामला भी सामने
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार गांव में अवैध मिट्टी खनन का मामला भी लंबे समय से चर्चा में है, लेकिन इस संबंध में पंचायत द्वारा कोई ठोस आपत्ति या कार्रवाई सामने नहीं आई।
कथित तौर पर यह भी सामने आया है कि गोटेगांव एसडीएम को व्हाट्सएप के माध्यम से अवैध मिट्टी खनन की सूचना भेजी गई थी, लेकिन इसके बाद भी मामले में कोई स्पष्ट निष्कर्ष सामने नहीं आया।
कोटवार की भूमिका पर उठे सवाल
इस पूरे मामले में ग्राम कोटवार की भूमिका भी ग्रामीणों को संदिग्ध नजर आ रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि कोटवार द्वारा प्रशासन को यह सूचना दी गई कि मौके पर कोई अवैध खनन नहीं किया जा रहा है।
जबकि ग्रामीणों द्वारा साझा की गई तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि ट्रैक्टर और जेसीबी मशीनों की मदद से मिट्टी का खनन किया जा रहा है।
अगर तस्वीरें सच कह रही हैं, तो फिर सवाल उठना लाज़मी है — प्रशासन तक सही जानकारी आखिर पहुंच क्यों नहीं पाई?
जवाब कौन देगा?
- क्या पंचायत निधि से मंत्री जी के कार्यक्रमों पर खर्च करना नियमों के अनुसार है?
- अवैध मिट्टी खनन की शिकायतों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
- क्या प्रशासन तक सही जानकारी पहुंचाई गई थी?
देवनगर पंचायत का यह पूरा मामला अब कई सवाल खड़े कर रहा है। ग्रामीणों की मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो, ताकि सच सामने आ सके।

