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सत्य और समाज के बीच की कड़ी

ग्राउंड रिपोर्ट: रेलवे स्टेशन पर बिक रहा ‘मौत का सलाद’? अगर खा लिया तो अस्पताल जाना तय समझिए!

स्थान – मुख्य रेलवे स्टेशन, प्लेटफार्म नंबर 2
समय – सुबह 11:15 बजे, चिलचिलाती धूप

हम इस वक्त शहर के रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर 2 पर खड़े हैं। चारों तरफ यात्रियों की भीड़ है। कोई ट्रेन पकड़ने की जल्दी में है, कोई प्यास से परेशान है, तो कोई सफर की थकान उतारने के लिए कुछ ठंडा ढूंढ रहा है।

इसी भीड़ के बीच एक आवाज बार-बार गूंज रही है—

“ताजी ककड़ी… ठंडी ककड़ी… दस रुपये की…!”

मुसाफिर सोचते हैं कि चलो थोड़ा सलाद खा लिया जाए, गर्मी में राहत मिल जाएगी। लेकिन अगर आप वही ककड़ी खा रहे हैं… तो जरा संभल जाइए।

क्योंकि जो नजारा इस वक्त हमारी आंखों के सामने है, उसे देखकर साफ लग रहा है कि यह सलाद नहीं, सीधे बीमारी का टिकट है।

गंदे हाथों से बन रहा है ‘सलाद’

प्लेटफार्म के एक कोने में खड़े इन ककड़ी बेचने वालों को जरा गौर से देखिए।

कपड़े ऐसे जैसे महीनों से धुले ही नहीं। पसीना, धूल और मैल की मोटी परत शरीर पर चिपकी हुई।

और उन्हीं हाथों से— उन्हीं काले और मैल से भरे नाखूनों से ककड़ी का छिलका उतारा जा रहा है।

पास खड़े रहना भी मुश्किल है। पसीने और सड़न की मिली-जुली बदबू इतनी तेज कि आदमी दो मिनट में ही पीछे हट जाए। लेकिन वही हाथ सीधे उस ककड़ी को छू रहे हैं, जिसे आप और आपके बच्चे बड़े आराम से खा रहे हैं।

ककड़ी नहीं… गंदगी का ढेर

अब जरा नीचे नजर डालिए।

ककड़ियां किसी साफ टोकरी में नहीं रखी हैं। कोई कागज नहीं। कोई ढकने का इंतजाम नहीं।

बस एक काला, बदबूदार और धूल से सना कपड़ा, जो शायद महीनों से जमीन पर घिसट रहा है।

उसी कपड़े पर ककड़ियां बिछी हैं और ऊपर से मक्खियों की फौज मंडरा रही है।

वही मक्खियां जो थोड़ी देर पहले रेलवे ट्रैक की गंदगी और कचरे पर बैठी थीं, अब सीधे आपके सलाद पर उतर रही हैं।

यह सीधे-सीधे बीमारी को बुलावा है

जब बेचने वाले के हाथ गंदे हों… ककड़ी रखने की जगह गंदी हो… और मक्खियां लगातार बैठ रही हों… तो समझ लीजिए कि यह फूड प्वॉइजनिंग का खुला खेल है।

डॉक्टरों के अनुसार ऐसी हालत में कटी हुई ककड़ी खाने से हैजा, टायफाइड और हेपेटाइटिस-A जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

रेलवे प्रशासन की नाक के नीचे खेल

सबसे बड़ा सवाल यही है— रेलवे स्टेशन जैसे संवेदनशील इलाके में यह सब खुलेआम कैसे चल रहा है?

प्लेटफार्म पर हजारों यात्री रोज आते-जाते हैं। लेकिन शायद इन गंदे ठेलों पर किसी की नजर नहीं पड़ती, या फिर सब कुछ देखकर भी आंखें बंद कर ली जाती हैं

यात्रियों के लिए चेतावनी

अगर आप रेलवे स्टेशन पर कटी हुई ककड़ी खरीदकर खा रहे हैं तो जरा संभल जाइए।

₹10 की यह ककड़ी कई बार आपको सीधे अस्पताल के बेड तक पहुंचा सकती है।

बेहतर है कि ककड़ी खुद खरीदें, अच्छी तरह धोएं और अपने सामने छिलवाएं।

वरना यह ठंडी ककड़ी आपके लिए गर्म मुसीबत बन सकती है।

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