रेलवे स्टेशन पर पानी की बर्बादी, यात्री प्यासे! आखिर जिम्मेदार कौन?
विशेष रिपोर्ट | नरसिंहपुर
एक ओर सरकार "जल गंगा संवर्धन अभियान" के माध्यम से जल संरक्षण का संदेश दे रही है, वहीं दूसरी ओर नरसिंहपुर रेलवे स्टेशन पर बहुमूल्य पानी खुलेआम बर्बाद होता दिखाई दे रहा है।
गर्मी के इस मौसम में जहां आम नागरिक और यात्री पीने के पानी के लिए परेशान रहते हैं, वहीं नरसिंहपुर रेलवे स्टेशन परिसर में लगे जल नलों से लगातार पानी बहने की तस्वीरें सामने आई हैं। तस्वीरों में स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि नलों से निकलता पानी बिना किसी उपयोग के व्यर्थ बह रहा है।
🚰 जल संरक्षण के दावों पर सवाल
देशभर में जल संरक्षण को लेकर जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। मध्यप्रदेश में भी "जल गंगा संवर्धन अभियान" के तहत लोगों को पानी की एक-एक बूंद बचाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। लेकिन रेलवे स्टेशन जैसी सार्वजनिक जगह पर पानी की इस तरह की बर्बादी कई सवाल खड़े करती है।
👥 यात्री बोले - पानी चाहिए, बर्बादी नहीं
रेलवे स्टेशन पर आने वाले यात्रियों का कहना है कि कई बार पीने के पानी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं मिलती, जबकि दूसरी ओर खुले नलों से लगातार पानी बहता रहता है। यदि समय रहते ऐसी व्यवस्थाओं की निगरानी की जाए तो हजारों लीटर पानी बचाया जा सकता है।
"जब सरकार पानी बचाने की अपील कर रही है, तब सार्वजनिक संस्थानों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है।"
❓ जिम्मेदार कौन?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर स्टेशन परिसर में पानी की इस बर्बादी की जिम्मेदारी किसकी है? क्या संबंधित विभाग नियमित निरीक्षण नहीं कर रहा, या फिर शिकायतों के बावजूद समस्या को नजरअंदाज किया जा रहा है?
जल संरक्षण केवल अभियान चलाने से नहीं होगा, बल्कि हर स्तर पर जवाबदेही और सतर्कता से ही संभव है। रेलवे प्रशासन को इस ओर तत्काल ध्यान देकर पानी की बर्बादी रोकने के प्रभावी कदम उठाने चाहिए।
क्या जल संरक्षण सिर्फ नारों तक सीमित रहेगा, या फिर सरकारी संस्थान भी पानी की हर बूंद बचाने की जिम्मेदारी निभाएंगे?
