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होली , , पर रिश्तों की मर्यादा होती तार तार?*

अब वो दौर गुजर गया जब होली के दिन घर-घर में गीत गाते हुए, फाग गाते हुए ही रंग-अबीर लगाने, पुए-पकवान खाने की परंपरा थी! होली का सबसे परेशान करने वाला पहलू यह है कि, ऐसा लगता है जैसे होली में व्यक्तिगत सीमाओं का उल्लंघन करने की खुली छूट दी जाती है! "बुरा न मानो, होली है" यह पुरुषों को उत्सव के बहाने महिलाओं को गलत तरीके से छूने, उन पर हमला करने और उन्हें परेशान करने का एक बहाना मात्र है।

अक्सर यह कहकर टाल दिया जाता है कि, ये तो मजाक के रिश्ते हैं! लेकिन कड़वी सच्चाई यह है कि, गलियों के अलावा, पारिवारिक समारोहों में भी भांग के नशे में होली मनाने को महिलाओं को गलत तरीके से छूने का बहाना बना लिया जाता है। ऐसी गंदी मानसिकता से ग्रस्त लोग होली के बहाने महिलाओं के स्तन और गुप्तांगों (छूना चाहते) पर गुब्बारा फेंकना चाहते हैं।

सड़कों से लेकर गली मोहल्ले और कॉलोनियों तक, महिलाएं और लड़कियां भटकती हुई ज़ुबानों और शिकारी निगाहों का शिकार बन जाती हैं! मैने खुद भी इसे देखा/महसूस किया है कि, कई बार महिलाओं को जबरदस्ती होली में शामिल किया जाता है, अक्सर उन्हें शारीरिक रूप से पकड़ा जाता है, उनके चेहरे पर जबरदस्ती रंग पोत दिया जाता है, और कभी-कभी तो उनके कपड़े भी फाड़ दिए जाते हैं।

खासतौर पर होली के आसपास इस तरह की घटनाएं अक्सर बढ़ जाती हैं! जहां होली के बहाने स्त्री की अस्मिता से खिलवाड़ किया जाता है! आम तौर पर यह माना जाता है कि होली के दौरान नियम-कानून शिथिल हो जाते हैं, इसलिए गांजा, भांग अंदर के राक्षस को बाहर निकालने का एक बहाना बन जाती है। होली पर यौन अपराधों में भयावह वृद्धि इसी कारण से होती है।

आज रिल्स और शॉर्ट्स के दौर में अनेक ऐसे वीडियो आपको देखने को मिल जाएंगे! जहां मनोरंजन या अभिव्यक्ति के नाम पर रिश्तों की मर्यादा को तार तार कर दिया जाता है! फेसबुक यूट्यूब पर ऐसे अनेक वीडियो देखने को मिल जाएंगे, जिसमें पुरुषों को महिलाओं को परेशान करते हुए दिखाया गया है। वे महिलाओं के हाथ पकड़ रहे हैं, उनके कपड़े खींच रहे हैं, "इन्हें गीला कर दो" जैसी अश्लील टिप्पणियां कर रहे हैं।

प्रेम, भाईचारे का उत्सव मनाने का दावा करने वाला यह त्योहार यौन अपराधियों के लिए महिलाओं को बेरोकटोक परेशान करने का एक खुला जरिया बन गया है?

होली अब केवल रंगों का खेल नहीं रह गया है—यह बल, अपमान और यौन हिंसा के माध्यम से महिलाओं और अल्पसंख्यकों पर हिंदू वर्चस्व स्थापित करने का जरिया बन गया है।

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