नरसिंहपुर सिर्फ़ एक जिला नहीं है। यह नर्मदा की धार, खेतों की हरियाली, जंगलों की छाया, बरसाती नालों की आवाज़ और गांवों में पसरे मौन सौंदर्य का नाम है।
“गांव–गांव सच का संवाद” किसी समस्या सूची या औपचारिक निरीक्षण की यात्रा नहीं, बल्कि उस नरसिंहपुर को खोजने का प्रयास है जो नक्शों में तो दर्ज है, पर शब्दों और किताबों में अब तक नहीं आया।
🌿 यात्रा की मूल अवधारणा
यह यात्रा सवाल पूछने नहीं, दृश्य देखने और अनुभव समझने निकली है।
🎯 यात्रा के उद्देश्य
🔸 नक्शों से बाहर बसे गांवों की खोज
उन गांवों तक पहुँचना जहाँ सड़कें समाप्त होती हैं और प्राकृतिक दृश्य आरंभ होते हैं।
🔸 नर्मदा और सहायक धाराओं के साथ बहते गांव
नदी किनारे बसे गांव, घाट, टापू, रेतीले विस्तार और पानी के साथ बदलते जीवन को देखना और दर्ज करना।
🔸 जंगल, पठार और खेतों के बीच का नरसिंहपुर
जिले के भौगोलिक विविध स्वरूप — जंगल, पठार और कृषि भूमि — इनके संगम में बसे गांवों की पहचान को समझना।
🔸 ऋतु, रोशनी और समय के साथ गांव
सुबह की धुंध, दोपहर की रोशनी, सांझ का सन्नाटा और रात के खुले आकाश में गांवों को देखना।
🔸 दृश्य जो संवाद रचते हैं
यह यात्रा बोलेगी कम, देखेगी ज़्यादा — और वहीं से संवाद जन्म लेगा।
📖 एक पुस्तक : जिला नहीं, भू-दृश्य
इस यात्रा के दौरान देखे गए दृश्य, मार्ग, ऋतु, गांवों की भौगोलिक बनावट और अनुभवों को आधार बनाकर नरसिंहपुर जिले के गांवों पर एक विशेष डॉक्यूमेंट्री तैयार की जाएगी।
यह डॉक्यूमेंट्री किसी रिपोर्ट की तरह नहीं, बल्कि एक Landscape Narrative होगी — जिसे पढ़ा नहीं, महसूस किया जाएगा।
“यह यात्रा सवालों के नहीं, दृश्यों के जवाब खोजने निकली है।”
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