युवतियां देह व्यापार को बना रहीं ‘शॉर्ट टाइम अर्निंग’?
गाडरवारा–गोटेगांव–करेली–नरसिंहपुर से निकली जमीनी सामाजिक सर्वे रिपोर्ट
यह रिपोर्ट किसी दफ्तर या फाइल के भरोसे नहीं बनी। बीते दिनों गाडरवारा, गोटेगांव, करेली और नरसिंहपुर क्षेत्र में चाय की दुकानों, कॉलेजों के आसपास, बस स्टैंड और मोहल्लों में युवा समूहों के साथ बैठकर बातचीत की गई। युवाओं ने जो देखा, सुना और महसूस किया — वही इस रिपोर्ट की बुनियाद है।
मैदान से आई आवाज़ें
“अब यह बातें छुपी नहीं रहीं… सबको पता है, बस कोई खुलकर बोलता नहीं।”
— गाडरवारा के एक युवा
“इंस्टाग्राम से बात शुरू होती है, फिर मिलने की जगह तय होती है।”
— गोटेगांव के युवा समूह की बातचीत
युवा समूहों से वार्ता में सामने आए तथ्य
- कम समय में ज्यादा पैसे की चाह तेजी से बढ़ रही है
- सोशल मीडिया इस नेटवर्क का सबसे आसान जरिया बन चुका है
- दलाल कोई बाहरी नहीं, अक्सर जान-पहचान का ही व्यक्ति होता है
- डर और बदनामी के कारण लोग नाम सामने लाने से बचते हैं
क्यों बन रहा है ‘शॉर्ट टाइम अर्निंग’?
युवाओं के अनुसार, नौकरी की तलाश लंबी है और खर्च तुरंत। ऐसे में कुछ युवतियां इसे “कुछ समय की बात” मानकर इस रास्ते पर आ जाती हैं। सोशल मीडिया की चमक, प्रशासनिक ढिलाई और सामाजिक चुप्पी इस सोच को और मजबूत कर रही है।
हकीकत जो बाद में सामने आती है
युवाओं ने माना कि शुरुआत में पैसा दिखाई देता है, लेकिन बाद में मानसिक तनाव, ब्लैकमेलिंग, शोषण और बाहर निकलने का रास्ता बंद हो जाता है।
“घुसना आसान है, लेकिन बाहर निकलना बहुत मुश्किल।”
— नरसिंहपुर के एक कॉलेज छात्र
निष्कर्ष
गाडरवारा, गोटेगांव, करेली और नरसिंहपुर क्षेत्र में युवाओं से हुई जमीनी बातचीत यह साफ संकेत देती है कि देह व्यापार अब छुपा हुआ अपराध नहीं, बल्कि ‘आसान कमाई का विकल्प’ समझा जाने लगा है। यह केवल कुछ युवतियों का नहीं, बल्कि पूरे समाज और प्रशासन की चुप्पी का परिणाम है।
