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सत्य और समाज के बीच की कड़ी

🚨 सड़क पर धड़ल्ले से बेची जा रही खुली खाद्य सामग्री और अमानक मसाले

क्या प्रशासन की नज़रें बंद हैं या सेहत सस्ती हो गई है?


नरसिंहपुर शहर और आसपास के कस्बों की मुख्य सड़कों, बस स्टैंड, बाजार चौक और साप्ताहिक हाट में इन दिनों एक खतरनाक खेल खुलेआम खेला जा रहा है। खुले में ढेर लगाकर बेचे जा रहे मसाले, मिर्च पाउडर, हल्दी, धनिया, चाट मसाला, यहां तक कि नमकीन और मिठाइयाँ भी बिना पैकिंग, बिना ब्रांड, बिना गुणवत्ता जांच के लोगों की थालियों तक पहुंच रही हैं।

🛑 धूल, मक्खियाँ और मिलावट का कॉकटेल

सुबह से शाम तक सड़क किनारे लगी टोकरी और प्लास्टिक के ड्रमों में भरे मसालों पर न कोई ढक्कन, न कोई लेबल। धूल उड़ती है, गाड़ियाँ गुजरती हैं, मक्खियाँ भिनभिनाती हैं — और वही मसाले सीधे ग्राहकों की रसोई में पहुँच जाते हैं।

“साहब, खुला मसाला सस्ता पड़ता है। लोग 10-20 रुपये में मांगते हैं। पैक वाला लेंगे तो महंगा पड़ेगा।”

लेकिन सवाल यह है कि सस्ता क्या सच में सस्ता है? या हम अपनी सेहत की कीमत चुका रहे हैं?

⚠️ अमानक मसालों का खेल

खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुसार मसालों में किसी भी प्रकार की कृत्रिम रंग मिलावट, ईंट का चूरा, सस्ता स्टार्च या अन्य केमिकल मिलाना दंडनीय अपराध है। लेकिन हकीकत में बाजार में बिक रहे कई मसालों का रंग अस्वाभाविक रूप से चमकीला दिखता है।

“हल्दी इतनी पीली है कि हाथ धोते-धोते रंग नहीं उतरता,” — एक गृहिणी ने नाराज़गी जताई।

🏛️ खाद्य विभाग की कार्रवाई कहाँ?

खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के नियमों के तहत खुले में बिकने वाली खाद्य सामग्री की नियमित जांच और सैंपलिंग जरूरी है। लेकिन जिले में पिछले कुछ महीनों से बड़े पैमाने पर कोई सख्त अभियान दिखाई नहीं दिया।

बाजारों में खुलेआम यह कारोबार चल रहा है, जिससे यह सवाल उठता है — क्या निरीक्षण सिर्फ कागजों में हो रहा है?

💊 सेहत पर खतरा

  • पेट दर्द और फूड पॉइजनिंग
  • लीवर पर असर
  • एलर्जी और त्वचा रोग
  • लंबे समय में गंभीर बीमारियाँ

गांव और छोटे कस्बों में लोग जागरूकता के अभाव में कीमत देखकर खरीद लेते हैं, गुणवत्ता की जांच करने का कोई साधन उनके पास नहीं होता।

📢 प्रशासन से मांग

  • सघन जांच अभियान चलाया जाए।
  • खुले मसालों के सैंपल लेकर लैब टेस्ट कराए जाएं।
  • दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई और जुर्माना लगाया जाए।
  • जनता को जागरूक करने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए।

सेहत के साथ समझौता बंद होना चाहिए — क्योंकि थाली में जहर परोसने वालों को छूट देना समाज के साथ अन्याय है।

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