ग्राम पंचायत बेदू में गबन का गंभीर मामला
दो वर्षों से बाजार नीलामी की राशि सरकारी खाते में जमा नहीं
ग्राम पंचायत बेदू में सरपंच पति बलराम द्वारा बाजार नीलामी की राशि लगभग 40 हजार रुपए दो वर्षों से सरकारी विभाग के खाते में जमा नहीं कराए जाने का मामला अब केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि गंभीर आपराधिक कृत्य की श्रेणी में आता दिखाई दे रहा है।
यह सिर्फ 40 हजार रुपए का मामला नहीं है, यह पंचायत व्यवस्था की ईमानदारी और जवाबदेही पर सीधा सवाल है।
⚖️ जांच में दोष सिद्ध हुआ तो कौन-कौन सी धाराएँ लग सकती हैं?
🔴 IPC धारा 409 – लोक सेवक द्वारा आपराधिक न्यासभंग
यदि यह सिद्ध होता है कि पंचायत की राशि को जानबूझकर रोका गया, या उसका दुरुपयोग किया गया, तो यह धारा सीधे लागू हो सकती है।
सजा: आजीवन कारावास या 10 वर्ष तक की जेल एवं जुर्माना
🔴 IPC धारा 406 – आपराधिक विश्वासघात
यदि गबन की मंशा साबित होती है लेकिन 409 की कठोर शर्तें पूरी नहीं होतीं।
सजा: 3 वर्ष तक की जेल या जुर्माना या दोनों
🔴 IPC धारा 420 – धोखाधड़ी
यदि नीलामी राशि को लेकर विभाग को गुमराह किया गया, या रिकॉर्ड में हेराफेरी सामने आती है।
सजा: 7 वर्ष तक की जेल और जुर्माना
🔴 IPC धारा 120-B – आपराधिक षड्यंत्र
यदि सरपंच और सरपंच पति की मिलीभगत साबित होती है, तो दोनों पर समान आपराधिक जिम्मेदारी तय की जा सकती है।
🧨 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988
धारा 13(1)(a) एवं 13(2)
सरपंच एक लोक सेवक है, और यदि पद का दुरुपयोग कर सरकारी धन का लाभ लिया गया तो यह धारा प्रभावी होगी।
सजा: 4 से 10 वर्ष तक की जेल एवं जुर्माना
सरपंच पति भले ही पद पर न हो, लेकिन यदि “डि-फैक्टो कंट्रोल” सिद्ध होता है तो वह भी मुख्य आरोपी बन सकता है।
🏛️ पंचायत राज अधिनियम के तहत कार्रवाई
- सरपंच को पद से हटाया जा सकता है
- भविष्य में चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित किया जा सकता है
- सरपंच पति पर सीधी आपराधिक कार्रवाई संभव
🚨 क्या जेल जाना संभव है?
हाँ। यदि जांच में गबन, जानबूझकर राशि रोकना और मिलीभगत सिद्ध होती है, तो सरपंच और सरपंच पति दोनों को जेल की सलाखों के पीछे भेजा जा सकता है।
अब सवाल यह नहीं कि राशि कब जमा होगी, सवाल यह है — क्या दोषियों पर कार्रवाई होगी या पंचायत व्यवस्था फिर बच निकलेगी?
