सुरवारी पंचायत शोध निष्कर्ष: महिला नेतृत्व निष्क्रिय, निर्णय प्रक्रिया में परोक्ष नियंत्रण के संकेत!
विस्तृत सर्वे एवं विश्लेषणात्मक रिपोर्ट | नरसिंहपुर
“सरपंच पति प्रथा का ग्राम विकास पर प्रभाव” विषय पर Stringer24 News द्वारा नरसिंहपुर जिले के गोटेगांव जनपद पंचायत अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत सुरवारी में जारी शोध सर्वे में प्रशासनिक संरचना और महिला नेतृत्व की वास्तविक स्थिति को लेकर गंभीर संकेत मिले हैं।
📊 सर्वे का दायरा
- कुल प्रतिभागी: 52 ग्रामीण नागरिक
- क्षेत्रीय कृषक: 6
- ग्राम सभा उपस्थिति विश्लेषण
- पंचायत कार्यालय निरीक्षण: 3 दिन
📌 प्रमुख निष्कर्ष (डेटा आधारित)
- 78% प्रतिभागियों ने कहा कि महिला सरपंच नियमित रूप से पंचायत भवन नहीं आतीं।
- 69% प्रतिभागियों ने निर्णय प्रक्रिया में सरपंच पति की सक्रिय भूमिका देखी।
- 61% ग्रामीणों ने कहा कि वास्तविक नेतृत्व निर्वाचित प्रतिनिधि के हाथ में नहीं दिखता।
- 54% प्रतिभागियों ने पारदर्शिता को “कमज़ोर” बताया।
शोध संकेत देता है कि निर्वाचित महिला नेतृत्व की सक्रियता सीमित है, जबकि निर्णय प्रक्रिया में परोक्ष प्रभाव की धारणा प्रबल है।
🔍 स्थल निरीक्षण अवलोकन
शोध दल द्वारा तीन अलग-अलग अवसरों पर पंचायत भवन का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान सरपंच की अनुपस्थिति दर्ज की गई। स्थानीय स्तर पर संवाद के दौरान कई ग्रामीणों ने बताया कि प्रशासनिक संवाद प्रायः पति अथवा अन्य व्यक्तियों के माध्यम से संचालित होता है।
⚖ विश्लेषण
यदि निर्वाचित प्रतिनिधि स्वयं निर्णय प्रक्रिया में सक्रिय नहीं हैं, तो यह न केवल लोकतांत्रिक सिद्धांतों को प्रभावित करता है, बल्कि महिला सशक्तिकरण के मूल उद्देश्य को भी कमजोर करता है।
पंचायत शासन प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही की दृष्टि से यह प्रवृत्ति दीर्घकालिक प्रशासनिक असंतुलन उत्पन्न कर सकती है।
📑 प्रशासन हेतु अनुशंसा
- पंचायत बैठकों की अनिवार्य उपस्थिति रजिस्टर की निगरानी
- महिला सरपंच के प्रत्यक्ष हस्ताक्षर और निर्णय की पुष्टि
- ग्राम सभा की वीडियो रिकॉर्डिंग व्यवस्था
- प्रशिक्षण एवं नेतृत्व सुदृढ़ीकरण कार्यक्रम
यह रिपोर्ट आरोप नहीं, बल्कि डेटा-आधारित प्रशासनिक समीक्षा का संकेत है।
समेकित जिला स्तरीय रिपोर्ट शीघ्र प्रस्तुत की जाएगी।
