अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे सरपंच पति और सचिव?: ग्राम पंचायत पनारी, जनपद चिचली, नरसिंहपुर
नरसिंहपुर। इसे आप बेशर्मी की इंतहा कहें या फिर गबन की साजिश की एक और कड़ी? ग्राम पंचायत पनारी की तस्वीर कुछ ऐसी ही कहानी बयान कर रही है। गांव में स्वच्छता का नामो निशान दिखाई नहीं देता। ग्रामीण संक्रमण और बदबू के बीच जीने को मजबूर हैं। नालियों की साफ-सफाई महीनों से नहीं हुई, और अब तो नालियों के किनारे बड़ी-बड़ी झाड़ियां उग आई हैं, जैसे सफाई व्यवस्था को खुली चुनौती दे रही हों।
हैंडपंप के आसपास मच्छरों के लाखों लार्वा पनप रहे हैं। मौसम में बदलाव के साथ मच्छरों का प्रकोप बढ़ चुका है, लेकिन पंचायत को अपनी जेब भरने से फुर्सत हो तब ना वह ग्रामीणों की सुध ले। बीमारी दस्तक दे रही है, लेकिन जिम्मेदारों के कानों तक शायद यह आवाज पहुंच नहीं रही — या फिर जानबूझकर अनसुनी की जा रही है?
ग्रामीणों का आरोप
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि सरपंच पंचायत में दिखाई ही नहीं देतीं। सरपंच पति कमीशनबाजी के फेर में पंचायत में डेरा डाले रहते हैं। सचिव से कई बार शिकायत की जा चुकी है, लेकिन गरीबों की सुनवाई कहीं नहीं।
एक स्थानीय महिला ने आक्रोश में कहा — “सरपंच पति और सचिव मिलकर अपनी तिजोरियां भर रहे हैं और गांव वालों को गंदगी के हवाले कर दिया है। कागजों में साफ-सफाई के बिल लगते हैं, लेकिन पनारी में सफाई कहां है?”
मनरेगा हो या सफाई का काम — प्राथमिकता चहेतों को, उपेक्षा गरीबों को?
चाय के टपरे पर बैठे कुछ ग्रामीणों ने बताया कि सचिव पहले अपने खास लोगों का काम करता है। बड़े लोगों की ही सुनवाई होती है। गरीबों की फाइलें धूल खाती रहती हैं। मनरेगा में भी उन्हीं लोगों को प्राथमिकता दी जाती है जो “करीबी” हों — ताकि मजदूरी की राशि में हेरफेर का खेल आसानी से खेला जा सके।
सवाल प्रशासन से
सवाल यह है कि क्या जनपद और जिला प्रशासन इस पूरे मामले पर ध्यान देगा? क्या ग्राम पंचायत पनारी में हुए कथित अनियमितताओं की जांच होगी? या फिर यह सब यूं ही चलता रहेगा — कागजों में विकास और जमीन पर सड़ांध?
अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी इस मामले में क्या रुख अपनाते हैं। क्योंकि अगर समय रहते सफाई और पारदर्शिता नहीं आई, तो यह गंदगी सिर्फ नालियों तक सीमित नहीं रहेगी — यह व्यवस्था की सोच में भी दिखाई देगी।


