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नरसिंहपुर बस स्टैंड बना “शोभा की सुपारी”

महिलाओं की सुरक्षा, सफाई व्यवस्था और नियमों की खुली अनदेखी पर बड़ा सवाल

मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर जिले में कहने को तो एक विशाल और आधुनिक बस स्टैंड मौजूद है। कागज़ों में यह यात्रियों की सुविधा और विकास का प्रतीक है, लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयान करती है। जिस प्रतीक्षालय को महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों के सुरक्षित इंतज़ार के लिए बनाया गया था, वही आज शराबखोरी और अव्यवस्था का अड्डा बनता जा रहा है।

प्रतीक्षालय के कोनों में पड़ी बियर और शराब की खाली बोतलें, डिस्पोजेबल ग्लास, चखने के पाउच और गंदगी का अंबार — यह दृश्य खुद बयां करता है कि यहां यात्रियों से ज्यादा नशेबाज़ों की मौजूदगी है।

साफ-सफाई का अभाव, बदहाल हालात

बस स्टैंड परिसर में साफ-सफाई की स्थिति भी बेहद चिंताजनक है। फर्श पर फैली गंदगी, बदबू मारते कोने, कूड़े के ढेर और अव्यवस्थित बैठने की जगहें यात्रियों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई हैं। प्रतीक्षालय में नियमित सफाई न होने के कारण वातावरण अस्वच्छ और असुरक्षित महसूस होता है।

सवाल यह है कि क्या नगर पालिका या संबंधित विभाग कभी यहां निरीक्षण करने आता है? क्या यह स्थान केवल निर्माण के समय ही “महत्वपूर्ण” था, उसके बाद इसे हालात के भरोसे छोड़ दिया गया?

महिलाएं खड़ी, भय का माहौल कायम

सबसे अधिक चिंता महिलाओं और युवतियों की सुरक्षा को लेकर है। मौसम कोई भी हो — झुलसाती गर्मी, बरसात या कड़ाके की ठंड — उन्हें बस की प्रतीक्षा होटल और नाश्ते की दुकानों के सामने खड़े होकर करनी पड़ती है।

जब प्रतीक्षालय में नशे में धुत लोग बैठे हों, ऊँची आवाज़ में बातें कर रहे हों या संदिग्ध गतिविधियां दिखाई देती हों, तो कोई भी महिला वहां बैठना सुरक्षित नहीं समझती। ऐसी स्थिति में छेड़छाड़ या किसी अप्रिय घटना की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

क्या प्रशासन तब जागेगा जब कोई बड़ी अनहोनी हो जाएगी? क्या महिलाओं की सुरक्षा केवल भाषणों तक सीमित है?

होटलों में घरेलू गैस सिलेंडर का व्यवसायिक उपयोग?

बस स्टैंड परिसर में संचालित कुछ होटल और नाश्ते की दुकानों में घरेलू गैस सिलेंडर का खुलेआम व्यवसायिक उपयोग किए जाने की जानकारी भी सामने आ रही है। यदि यह सच है, तो यह न केवल नियमों का उल्लंघन है बल्कि गंभीर सुरक्षा जोखिम भी है।

घरेलू गैस सिलेंडर का व्यावसायिक उपयोग प्रतिबंधित है, क्योंकि इससे हादसे की संभावना बढ़ जाती है। बस स्टैंड जैसे भीड़भाड़ वाले स्थान पर यदि सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जा रही है, तो यह किसी बड़े हादसे को न्योता देने जैसा है।

प्रशासन से सीधे सवाल

  • क्या बस स्टैंड पर नियमित पुलिस गश्त होती है?
  • क्या सीसीटीवी कैमरे कार्यरत हैं?
  • क्या खाद्य एवं गैस सुरक्षा मानकों की जांच की गई है?
  • साफ-सफाई के लिए जिम्मेदार कर्मचारियों की निगरानी कौन कर रहा है?

करोड़ों की लागत से बने इस बस स्टैंड का उद्देश्य यात्रियों को सुविधा देना था, लेकिन वर्तमान हालात इसे असुविधा और असुरक्षा का केंद्र बना रहे हैं। यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो यह केवल नाम का “विशाल बस स्टैंड” रह जाएगा।

महिलाओं की सुरक्षा, स्वच्छता और नियमों का पालन — यही किसी भी सभ्य समाज की असली पहचान है।
अब देखना यह है कि जिम्मेदार विभाग कब जागता है।
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