बरमान में प्रशासन की यह कैसी चेकिंग है?
रेगुलेटर देखा, पाइप टटोला… लेकिन सिलेंडर पर आंख मूंद ली!बरमान घाट क्षेत्र में जिला प्रशासन की मुस्तैदी एक बार फिर फेसबुक पोस्ट तक सिमटकर रह गई? सोशल मीडिया पर साझा की गई तस्वीरों और शब्दों से यह संदेश देने की कोशिश की गई कि प्रशासन पूरी गंभीरता से गैस सुरक्षा को लेकर काम कर रहा है!
दावा किया गया कि कलेक्टर श्रीमती रजनी सिंह के निर्देशन में होटल, रेस्टॉरेंट और चाय-नाश्ते की दुकानों में एलपीजी गैस सिलेंडर, रेगुलेटर, पाइप और चूल्हों की तकनीकी जांच कराई गई!
लेकिन सिलेंडर कभी गलत नहीं हो सकता!
पोस्ट के साथ दो तस्वीरें भी साझा की गईं, ताकि जनता को यह भरोसा हो जाए कि सब कुछ “नियम के मुताबिक” हो रहा है। लेकिन इन्हीं तस्वीरों ने प्रशासन की इस कार्रवाई पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है।
क्या जांच के दौरान घरेलू गैस सिलेंडर दिखाई नहीं दिए?
बरमान घाट में यह किसी से छिपा नहीं है कि ढाबों, चाय दुकानों और होटलों में धड़ल्ले से घरेलू गैस सिलेंडर का व्यवसायिक उपयोग हो रहा है। यह न सिर्फ नियमों का खुला उल्लंघन है, बल्कि शासन के राजस्व पर सीधा प्रहार भी।
या फिर ये वही सिलेंडर हैं, जो जांच के समय अदृश्य हो जाते हैं?
अगर जांच वास्तव में ईमानदार होती, तो जवाब भी सामने होता— कितने घरेलू सिलेंडर जब्त किए गए? कितने चालान काटे गए? कितनी एफआईआर दर्ज हुई?
या फिर यह पूरी कवायद सिर्फ फोटो खिंचवाने, पोस्ट डालने और वाहवाही बटोरने तक ही सीमित थी?
सबसे चिंताजनक सवाल यह है कि क्या घरेलू गैस सिलेंडर के व्यवसायिक इस्तेमाल को जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है, ताकि किसी का “नुकसान” न हो — भले ही शासन को हर दिन लाखों के राजस्व का नुकसान क्यों न उठाना पड़े।
क्या जांच सिर्फ दिखाने के लिए होती है?
और क्या कानून सिर्फ कमजोरों के लिए बना है?
