सचिव और सरपंच पति की जुगलबंदी?:
ग्राम पंचायत रातिकरार कला | करेली | नरसिंहपुर
ग्राम पंचायत में अनियमितता हो और सचिव चुप रहे —
तो सवाल सिर्फ भ्रष्टाचार का नहीं, साठगांठ और हिस्सेदारी का भी उठता है!
सचिव शासकीय सेवक होता है। नियम साफ कहते हैं कि ग्राम पंचायत में यदि किसी भी प्रकार की वित्तीय या प्रशासनिक अनियमितता सामने आती है, तो सचिव की जिम्मेदारी होती है कि वह तत्काल प्रशासन को अवगत कराए।
लेकिन नरसिंहपुर जिले की कई ग्राम पंचायतों में नियम नहीं, ट्रेड चलता दिखाई दे रहा है!
यहां सरपंच पति खुलेआम पंचायत में दखल देते हैं, फैसले लेते हैं, भुगतान कराते हैं — और महिला सरपंच महीनों तक पंचायत कार्यालय का मुंह तक नहीं देखतीं!
इसके बावजूद न कोई आपत्ति, न कोई शिकायत, न कोई नोटशीट!
बताया जाता है कि सरपंच पति डीएससी और मोबाइल का उपयोग करते हैं, कई मामलों में तो खुद ही पत्नी के हस्ताक्षर कर काम निपटा दिए जाते हैं।
तो फिर सचिव की खामोशी क्यों?
ग्रामीणों का कहना है कि —
“कमीशन और हिस्सेदारी के आगे नियम बौने पड़ जाते हैं।”
इसीलिए सचिव चुप रहना ही बेहतर समझते हैं।
रातिकरार कला का मामला
ऐसा ही एक गंभीर मामला सामने आया है ग्राम पंचायत रातिकरार कला से, जहां सिर्फ 10 महीनों के भीतर भरत राजपूत के नाम पर भूसा खरीदी के लिए करीब 4 लाख रुपये से अधिक की राशि खर्च दिखाई गई है।
क्या पंचायत में सच में इतना भूसा खरीदा गया? या कागजों में ही मवेशी पेट भरते रहे?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि — इतनी बड़ी राशि के भुगतान पर सचिव ने आपत्ति क्यों नहीं उठाई?
क्या यह महज लापरवाही है, या फिर सचिव और सरपंच पति की मिलीभगत?
अब निगाहें प्रशासन पर
क्या करेली जनपद पंचायत और जिला प्रशासन इस पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराएगा?
या फिर यह मामला भी फाइलों के बोझ तले दबा दिया जाएगा?
