सरपंच–सचिव के नाम पर बिल!
क्या पंचायत में नियमों की जगह मनमानी ने ले ली है?
ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन के उपयोग की प्रक्रिया तय है, नियमबद्ध है, लेकिन ग्राम पंचायत सहावन में सामने आए बिलों ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि— सरपंच और सचिव के नाम पर बिल क्यों लगाए गए? इसके पीछे मंशा क्या थी?
जानकारी के अनुसार आंगनबाड़ी निर्माण कार्य के लिए ईंट और सेंटिंग के बिल सीधे सरपंच बलबीर के नाम पर लगाए गए हैं। यही नहीं, भुगतान की प्रक्रिया में सचिव की भूमिका भी सवालों के घेरे में है।
क्या यह विभागीय प्रक्रिया का उल्लंघन नहीं?
पंचायतों में किसी भी निर्माण कार्य के लिए सामग्री खरीद की एक स्पष्ट प्रक्रिया होती है। सामग्री आपूर्ति के लिए अधिकृत फर्म, ठेकेदार या विक्रेता होना आवश्यक है। इसके बावजूद यदि सरपंच या सचिव के व्यक्तिगत नाम पर बिल बनाए जाते हैं, तो यह सीधे तौर पर विभागीय नियमों की अवहेलना मानी जाती है।
यह सवाल भी अहम है कि— क्या जानबूझकर नियमों को दरकिनार किया गया? या फिर सरकारी धन को वैध दिखाने की कोशिश हुई?
नियम क्या कहते हैं?
ग्राम पंचायत सहावन में सरपंच बलबीर के नाम पर आंगनबाड़ी निर्माण के लिए ईंट और सेंटिंग के बिल लगाए गए हैं, तो स्पष्ट तौर पर यह पूरी तरह से गलत और वित्तीय नियमों का उल्लंघन है।
पंचायती राज अधिनियम और वित्तीय नियमों (Financial Rules) के अनुसार इसके गलत होने के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
1. सरपंच "विक्रेता" नहीं हो सकता
सरपंच का कार्य पंचायत के विकास कार्यों की निगरानी करना और भुगतान को स्वीकृति देना होता है। वह स्वयं सामान बेचने वाला (Vendor) नहीं हो सकता। यदि ईंटें खरीदी गई हैं, तो बिल ईंट भट्ठा मालिक या अधिकृत फर्म के नाम पर होना चाहिए, न कि सरपंच के व्यक्तिगत नाम पर।
2. वित्तीय अनियमितता (Financial Irregularity)
सरकारी राशि का भुगतान सीधे सरपंच के नाम पर करना Self-Benefiting की श्रेणी में आता है। यह भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और पंचायत राज नियमावली के अंतर्गत गबन (Embezzlement) या पद के दुरुपयोग का मामला बन सकता है।
3. GST और टैक्स नियमों की अनदेखी
निर्माण सामग्री की खरीदी के लिए संबंधित फर्म का GST नंबर और वैध कर बिल होना अनिवार्य है। सरपंच के नाम पर बिल दर्शाता है कि टैक्स नियमों की अनदेखी की गई और सरकारी प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ।
जांच की मांग तेज
अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराएगा या फिर पंचायत स्तर की इस अनियमितता पर आंखें मूंद ली जाएंगी। ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों के बीच यह चर्चा तेज हो चुकी है कि यदि समय रहते जांच नहीं हुई, तो ऐसे मामलों से पंचायत व्यवस्था की साख पर गंभीर सवाल खड़े होंगे।
Stringer24 News इस पूरे मामले पर प्रशासनिक कार्रवाई और जांच की प्रगति पर लगातार नजर बनाए रखेगा।
