ग्राम पंचायतों का जादुई विकास: फाइलों में सड़कें, जमीन पर खाई!
नरसिंहपुर जिले की ग्राम पंचायतों के विकास से तो वाकिफ ही होंगे आप…
और अगर नहीं हैं, तो आइए बताएं आपको — वो कारनामें जिनकी चमक सिर्फ कागज़ों में दिखती है,
जमीन पर नहीं!
कोई इसे गबन कहता है, कोई गोलमाल, कोई हेरफेर, कोई स्कैम… लेकिन जो खुद को इस खेल का माहिर खिलाड़ी मानते हैं न भैया, उनके लिए ये सब तो बस हाथ की सफाई है। जैसे बच्चे कंचे खेलते हैं, वैसे ये करोड़ों के हिसाब उंगलियों पर नचाते हैं!
खैर… अगर समझा नहीं, तो नहीं समझा। और न ही अब समझने का शौक है!
आप लोग बस स्टोरी पढ़िए मजे से, क्योंकि और कर भी क्या सकते हैं?
किस-किस से भिड़ोगे? नेता से? गुंडों से? ठेकेदार से? या शराब, रेत, ड्रग, सागौन, भू-माफिया से… जिनकी गर्दन दबाओ तो आपकी ही गर्दन मरोड़ दें!
और ऊपर से कुर्सियों पर बैठे वो चंड-मुंड अधिकारी… जो रिश्वत को रोज़ का प्रसाद समझते हैं। आपने ज्यादा ज़ुबान खोली तो ऐसा केस चिपकाएंगे कि आप ही अदालतों के चक्कर लगाते फिरें, और वो आराम से नई फाइलें “निपटा” रहे हों।
कोई इसे गबन कहता है, कोई गोलमाल, कोई हेरफेर, कोई स्कैम… लेकिन जो खुद को इस खेल का माहिर खिलाड़ी मानते हैं न भैया, उनके लिए ये सब तो बस हाथ की सफाई है। जैसे बच्चे कंचे खेलते हैं, वैसे ये करोड़ों के हिसाब उंगलियों पर नचाते हैं!
अब आप सोच रहे होंगे कि मीडिया वाले क्यों नहीं बोलते?क्योंकि मीडिया के सामने भी पूरा बटालियन है—नेता की धमकी, माफिया की घुरघुराहट,और ऊपर से वो अफसर जो फाइल रोककर आपको ठंडा करना जानते हैं।
और साहब, फाइल रोकना भी कोई कम सज़ा नहीं!आज शिकायत लगाइए,कल उसी शिकायत की जांच के नाम पर आपका नाम ही संदिग्धों की सूची में डाल दिया जाता है।जो नहीं किया—वो भी आपके माथे पर चिपका देंगे।
और इसीलिए…कई पत्रकारों ने तो चुप रहना सीख लिया है।कुछ ने समझदारी में,कुछ ने मजबूरी में,और कुछ ने इसलिए क्योंकि सच बोलना यहाँ नियम नहीं—जोखिम है!हालांकि कुछ लोगों के लिए ये पूरा खेल किसी सोने का अंडा देने वाली मुर्गी से कम नहीं!कितनी बार मुझे ही कहा गया है— “तुम तो बस मामले को रगड़ते रहते हो… तुम्हें क्या पता, ये मुर्गी रोज़ सोने का अंडा देती है!”
खैर… अगर समझा नहीं, तो नहीं समझा। और न ही अब समझने का शौक है!
आप लोग बस स्टोरी पढ़िए मजे से, क्योंकि और कर भी क्या सकते हैं?
किस-किस से भिड़ोगे? नेता से? गुंडों से? ठेकेदार से? या शराब, रेत, ड्रग, सागौन, भू-माफिया से… जिनकी गर्दन दबाओ तो आपकी ही गर्दन मरोड़ दें!
और ऊपर से कुर्सियों पर बैठे वो चंड-मुंड अधिकारी… जो रिश्वत को रोज़ का प्रसाद समझते हैं। आपने ज्यादा ज़ुबान खोली तो ऐसा केस चिपकाएंगे कि आप ही अदालतों के चक्कर लगाते फिरें, और वो आराम से नई फाइलें “निपटा” रहे हों।
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