चिचली जनपद की ग्राम पंचायत बारहा बड़ा
सरपंच रंजना आखिर नीरज अहिरवार पर इतनी मेहरबानी क्यों?
चिचली जनपद अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत बारहा बड़ा में पंचायत खर्चों को लेकर जो तस्वीर उभरकर सामने आ रही है, वह केवल लापरवाही नहीं बल्कि संभावित आर्थिक अनियमितता की ओर साफ इशारा करती है।
सवाल यह नहीं कि भुगतान हुआ है… सवाल यह है कि भुगतान बार-बार एक ही नाम पर क्यों?
पंचायत अभिलेखों में स्टेशनरी और फोटोकॉपी जैसे सामान्य कार्यों के लिए हजारों रुपये के भुगतान नीरज अहिरवार के नाम पर दर्शाए गए हैं। यह संयोग है या फिर किसी सुनियोजित व्यवस्था का हिस्सा?
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में न तो ऐसा कोई कार्यालयीय दबाव है और न ही इतनी बड़ी मात्रा में कागजी कार्यवाही, फिर फोटोकॉपी के नाम पर इतना भारी खर्च आखिर कैसे जायज ठहराया जा सकता है?
तीखे सवाल जो जवाब मांगते हैं
- क्या पंचायत के पास फोटोकॉपी कार्य का कोई लिखित रिकॉर्ड मौजूद है?
- किस योजना, किस बैठक या किस कार्य के लिए हजारों पन्नों की फोटोकॉपी कराई गई?
- क्या पंचायत ने किसी अन्य दुकानदार से कोटेशन मंगवाया था?
- बार-बार भुगतान एक ही व्यक्ति के नाम पर क्यों दर्शाया गया?
- क्या सरपंच की मौन स्वीकृति के बिना यह संभव था?
यह केवल पैसों का सवाल नहीं है, यह पंचायत में पारदर्शिता और जवाबदेही का सवाल है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जनपद प्रशासन और संबंधित अधिकारी अब तक इन भुगतानों पर चुप क्यों हैं? क्या यह अनदेखी भी इस मेहरबानी का हिस्सा है?
यदि सब कुछ नियमों के अनुसार है तो पंचायत को सार्वजनिक मंच पर बिल, रजिस्टर और भुगतान विवरण सामने रखने चाहिए। अन्यथा यह शक और गहराता जाएगा कि फोटोकॉपी के नाम पर पंचायत राशि का गोलमाल किया गया है।
अब देखना यह है कि जांच होगी या फिर सवालों को फाइलों में दबा दिया जाएगा।
