भ्रष्टाचार का ठेकेदार, लूट का ठिकेदार और पंचायत का अनाधिकारिक बादशाह!
पत्नी के नाम पर कुर्सी,
और खुद के नाम पर घोटालों की फाइलें!
ये आदमी सिर्फ गबन नहीं कर रहा —
ग्रामीणों के पेट पर लात मार रहा है!
सरकारी ज़मीन? — अपनी जायदाद में बदल ली!
विकास? — कागजों में पूरा, गांव में जीरो!
और जनपद सीईओ? शायद
गोल्डफ्लेक वाले भ्रष्टाचार का कश मारकर
कुर्सी पर ऐसे टिका है जैसे बरहेटा में रामराज्य चल रहा हो!पैसे की भूख इंसान को इतना गिरा देती है कि वो ना सिर्फ नैतिकता और इंसानियत भूल जाता है बल्कि कानून का भी कोई खौफ नहीं रहता।
चांदी के टुकड़ों की भूख ने सरपंच पति को इतना गिरा दिया कि,सरकारी जमीन पर ही अपना सपनों का महल खड़ा कर दिया!
इतना ही नहीं सूत्रों से प्राप्त जानकारी अनुसार इस शख्स ने मनरेगा में भी खूब खेल खेला है।सरकारी पैसों को हड़पने के लिए अपने ही गांव और ग्रामीणों से धोखा किया गया!
जनपद सीईओ कौन सा सुखा नशा करके बैठे हैं कि,उन्हें न तो गबन दिखता है, ना ग्रामीणों की दुर्दशा और न गबन की शिकायत?
क्या इस जनपद में कार्रवाई के लिए
पहले सरपंच पति को गबन का गोल्ड मेडल देना जरूरी है?
या फिर ग्रामीणों को
लाशें सड़क पर रखकर धरना देना पड़ेगा
तभी इन्हें गबन की गंध आएगी?
बरहेटा में सत्ता नहीं चल रही —
यहां डर, दादागिरी और दलाली का शासन है!
“पैसा है भाई… सब सेट है!”
लेकिन भ्रष्टाचारी ध्यान रख —
सत्य की फाइल बंद नहीं होती,
एक दिन धड़ाम से खुलती है!
और जब खुलेगी —
तेरे सपनों का महल
गिरवी नहीं…
सीधे गिरा दिया जाएगा!
